मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। UAE ने पाकिस्तान को दिया गया 3.5 अरब डॉलर (करीब 29,000 करोड़ रुपए) का कर्ज तुरंत वापस करने को कहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस महीने के अंत तक यह पूरी रकम चुकाने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे ईरान और इज़रायल के बीच जारी तनाव और सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी को अहम वजह माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता (SMDA) किया है, जिसके तहत संकट के समय सऊदी का साथ देने का वादा किया गया है। UAE और सऊदी अरब के बीच क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा पहले से रही है, ऐसे में पाकिस्तान की यह रणनीति UAE को रास नहीं आई। इसे कूटनीतिक स्तर पर ‘धोखे’ के तौर पर देखा जा रहा है।
Pakistan to return $3.5 bn UAE debt before month end amid reserve concerns
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— ANI Digital (@ani_digital) April 4, 2026
कर्ज चुकाने की तैयारी क्या है?
यह रकम फिलहाल स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास जमा है। पाकिस्तान इस कर्ज पर अब तक लगभग 6% ब्याज चुका रहा था।
पहले UAE हर साल इस कर्ज की समयसीमा बढ़ा देता था, जिसे ‘रोल ओवर’ कहा जाता है। लेकिन इस बार समयसीमा केवल कुछ महीनों के लिए बढ़ाकर 17 अप्रैल तक सीमित कर दी गई। अब पाकिस्तान ने अप्रैल के अंत तक पूरा कर्ज लौटाने का निर्णय लिया है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर
फिलहाल पाकिस्तान के पास करीब 21 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे वह इस कर्ज को चुका सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे आने वाले समय में उसकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
पाकिस्तान को इस साल चीन और सऊदी अरब जैसे देशों से भी कर्ज की अवधि बढ़वाने की उम्मीद थी, लेकिन UAE के इस सख्त रुख ने उसकी आर्थिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
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