यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने आधार डेटाबेस को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देशभर में ऐसे 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर—जो अब मृत व्यक्तियों से जुड़े थे—डिएक्टिवेट कर दिए गए हैं। यह पहल पुराने और निष्क्रिय रिकॉर्ड हटाने के साथ-साथ पहचान के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
UIDAI इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए देशभर से मृत व्यक्तियों से जुड़ा डेटा एकत्र कर रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI), विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) तथा नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम जैसी कई एजेंसियों से जानकारी जुटाई जा रही है। आगे चलकर UIDAI बैंकों और अन्य संस्थानों से भी मृत्यु संबंधी डेटा प्राप्त करने की योजना बना रहा है, ताकि रिकॉर्ड और अधिक सटीक बनाए जा सकें।
Unique Identification Authority of India (#UIDAI) deactivates over two crore Aadhaar numbers of deceased individuals as part of a nationwide clean-up effort to maintain the continued accuracy of the #Aadhaar database. pic.twitter.com/QnCfH0NWDZ
— All India Radio News (@airnewsalerts) November 27, 2025
महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार आधार नंबर डिएक्टिवेट हो जाने के बाद वह कभी किसी नए व्यक्ति को आवंटित नहीं किया जाता। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार निष्क्रिय कर दिया जाता है, ताकि कार्ड का गलत उपयोग या सरकारी योजनाओं का धोखाधड़ी से लाभ न लिया जा सके। इसी दिशा में UIDAI ने इस वर्ष परिवार के सदस्यों के लिए myAadhaar पोर्टल पर मृत्यु की सूचना देने की एक सरल सुविधा शुरू की है। यह सेवा फिलहाल 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है, जहाँ सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम का उपयोग होता है। शेष राज्यों को भी शीघ्र ही इस दायरे में शामिल किया जाएगा।
मृत्यु की जानकारी दर्ज कराने के लिए परिवार का सदस्य पोर्टल पर लॉगिन कर मृतक का आधार नंबर, डेथ रजिस्ट्रेशन नंबर और कुछ अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करता है। जानकारी सत्यापित होने के बाद UIDAI आधार को डिएक्टिवेट कर देता है या अन्य उपयुक्त कार्रवाई करता है।
UIDAI ने सभी आधारधारकों से अपील की है कि आधिकारिक डेथ सर्टिफिकेट प्राप्त होते ही अपने परिजनों की मृत्यु की सूचना myAadhaar पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि डेटाबेस सटीक रहे और पहचान के गलत इस्तेमाल से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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