भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत अब सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। दोनों पक्षों ने इस समझौते पर अंतिम सहमति बना ली है, जिसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा और अहम ट्रेड डील माना जा रहा है। भारत सरकार के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के अनुसार यह डील भारत के हितों के लिहाज से संतुलित और भविष्य उन्मुख है, जिससे भारत-EU के बीच आर्थिक जुड़ाव और व्यापार में तेज़ी आएगी।
इस समझौते को अंतिम रूप देने में करीब 18 साल लगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA पर बातचीत की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ बताते हुए कहा कि यह समझौता भारत के वैश्विक व्यापार विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा।
इस ऐतिहासिक डील की औपचारिक घोषणा मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में की जाएगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन में इस समझौते के व्यापक रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।
यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों पक्षों के बाजारों में व्यापार को आसान बनाएगा। इसके तहत भारत और EU लगभग 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क को खत्म या काफी हद तक कम करने पर सहमत हुए हैं। इससे वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और दोनों क्षेत्रों के व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
फिलहाल इस डील का लिखित मसौदा कानूनी जांच (लीगल वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया से गुजर रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसे इसी साल औपचारिक रूप से साइन कर लिया जाएगा और अगले साल से इसे लागू भी किया जा सकता है।
भारत को मिलने वाले प्रमुख फायदे
FTA लागू होने के बाद भारत के कई उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बिना या बेहद कम टैक्स के प्रवेश मिलेगा। खास तौर पर कपड़ा, केमिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, चमड़ा और जूते-चप्पल जैसे श्रम-आधारित सेक्टरों को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। इससे रोजगार सृजन को भी मजबूती मिलेगी।
वर्तमान में यूरोपीय संघ भारत से आने वाले सामानों पर औसतन 3.8 प्रतिशत टैक्स लगाता है, जबकि श्रम-प्रधान क्षेत्रों में यह टैक्स करीब 10 प्रतिशत तक है। वहीं भारत में यूरोप से आयात होने वाले सामानों पर औसतन 9.3 प्रतिशत शुल्क लगता है। खासकर गाड़ियों और उनके पुर्जों पर लगभग 35.5 प्रतिशत, प्लास्टिक पर 10.4 प्रतिशत और केमिकल्स व दवाओं पर करीब 9.9 प्रतिशत टैक्स वसूला जाता है। FTA के बाद इन बाधाओं में बड़ी कटौती होगी।
इस समझौते के तहत सिर्फ वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि सेवाओं के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सेवा क्षेत्रों में नियमों को आसान बनाया जाएगा, जिससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को यूरोप में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
FTA का रणनीतिक महत्व
साल 2014 के बाद NDA सरकार अब तक ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड, UAE, EFTA देशों के समूह और मॉरीशस के साथ कुल 7 बड़े व्यापार समझौते कर चुकी है। भारत-EU FTA को इनमें सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि यूरोपीय संघ भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार दबाव में है और भारत को भी कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का टैक्स झेलना पड़ रहा है। ऐसे हालात में यह FTA भारतीय निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, व्यापार को स्थिरता देगा और चीन पर निर्भरता कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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