कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद जिले में 6 दिसंबर को होने वाले ‘बाबरी मस्जिद’ नामक प्रस्तावित मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम को रोकने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और न्यायालय इसमें दखल नहीं देगा। कार्यवाहक चीफ जस्टिस की बेंच ने निलंबित TMC विधायक हुमायूँ कबीर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर उठाई गई चिंताओं पर भी स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन ने सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।
Calcutta High Court did not intervene in the case regarding the Babri Masjid in Murshidabad. The division bench of the acting Chief Justice left the responsibility of maintaining peace to the state.
The court did not interfere with the program of Humayun Kabir.
The state has…
— ANI (@ANI) December 5, 2025
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि संभावित तनाव को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं। साथ ही केंद्र सरकार ने भी यह जानकारी दी कि क्षेत्र में पहले से ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की 19 कंपनियाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूद हैं। अदालत को बताया गया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
यह पूरा विवाद तब पैदा हुआ जब विधायक हुमायूँ कबीर ने सोशल मीडिया पर ‘बाबरी मस्जिद’ नाम वाली मस्जिद के शिलान्यास का सार्वजनिक ऐलान किया। इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई और TMC नेतृत्व ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। 6 दिसंबर की तारीख जिस दिन अयोध्या में 1992 को विवादित ढाँचा ढहा था और मस्जिद के नाम ने इलाके में संभावित सांप्रदायिक तनाव की आशंका पैदा कर दी थी।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब गेंद सीधे राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के पाले में है, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अशांति या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel