फिल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज़ ने एक बार फिर भारतीय सेना के शूरवीर मेजर मोहित शर्मा को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ट्रेलर रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर यह अटकलें तेज़ हो गईं कि रणवीर सिंह फिल्म में मेजर मोहित शर्मा का किरदार निभा रहे हैं और कहानी उनकी जिंदगी से प्रेरित है। हालांकि बढ़ती अटकलों के बीच फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने साफ़ कहा कि ‘धुरंधर’ मेजर शर्मा के जीवन पर आधारित नहीं है और न ही रणवीर उनका रोल निभा रहे हैं। यह स्पष्टीकरण तब आया जब मेजर मोहित शर्मा के भाई मधुर शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनके माता-पिता इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि क्या वास्तव में फिल्म उनके बेटे पर आधारित है। इस पर आदित्य धर ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि वह मेजर मोहित शर्मा पर कोई बायोपिक बनाएँगे, तो यह केवल परिवार की अनुमति से होगी। उन्होंने कहा कि रणवीर का किरदार छिपाना सिर्फ फिल्म की कहानी में रोमांच बनाए रखने के लिए था।
मेजर मोहित शर्मा का नाम भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे साहसी और जोखिम भरे अंडरकवर ऑपरेशनों में से एक के लिए जाना जाता है। उनका जन्म रोहतक में हुआ और वे भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेस के एक बेहतरीन कमांडो थे। 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ऐसा मिशन किया जिसे आज भी सेना के इतिहास की सबसे चुनौतिपूर्ण घुसपैठ कहा जाता है। पत्रकार शिव अरूर और राहुल सिंह की किताब ‘इंडिया’स मोस्ट फीयरलेस 2’ में दर्ज विवरण के अनुसार, मेजर मोहित ने अपना नाम, हुलिया और पहचान बदलकर “इफ्तिखार भट्ट” के नाम से हिजबुल मुजाहिद्दीन में घुसपैठ की थी। लंबी दाढ़ी, बदला हुआ व्यक्तित्व और कश्मीरी लहजे के साथ उन्होंने न केवल आतंकियों का भरोसा जीता बल्कि उनसे योजनाएँ, हथियारों की व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों तक पहुंच भी हासिल कर ली।
इस मिशन में सबसे खतरनाक मोड़ तब आया जब हिजबुल के आतंकी अबू तोरारा और अबू सबजार को उन पर कई बार शक हुआ, लेकिन मेजर मोहित अपनी सूझबूझ और हिम्मत से हर बार उनका विश्वास जीतने में सफल रहे। एक मौके पर जब उनसे बार-बार पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपनी राइफल जमीन पर रखकर आतंकियों से कहा— “अगर शक है तो मुझे यहीं मार दो। लेकिन मैं सच कहता हूँ—मैं तुम्हारी मदद करने आया हूँ।”
उनका यह साहसिक कदम आतंकियों की शंका तोड़ गया और वे पूरी तरह उन पर भरोसा करने लगे। कुछ ही दिनों में उन्होंने मेजर मोहित को आतंकी हमले की तैयारी में शामिल भी कर लिया। पर मेजर मोहित सही मौके का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार एक उपयुक्त क्षण मिलते ही उन्होंने अपनी 9mm पिस्टल लोड की और दोनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। यह ऑपरेशन दक्षिण कश्मीर में हिजबुल के नेटवर्क के लिए भारी झटका साबित हुआ और भारतीय सेना की रणनीतिक बढ़त को मजबूत किया।
इस ऐतिहासिक अंडरकवर ऑपरेशन के पाँच साल बाद, 2009 में कुपवाड़ा जिले में एक भीषण मुठभेड़ के दौरान मेजर मोहित शर्मा ने अपने साथियों को बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। राष्ट्र ने उनकी वीरता, बुद्धिमत्ता और देशभक्ति के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया—जो भारत का सर्वोच्च शांति-काल वीरता पुरस्कार है।
फिल्म ‘धुरंधर’ के ट्रेलर के बाद उनके जीवन पर आधारित होने की चर्चा ने मेजर मोहित शर्मा की अद्भुत गाथा को एक बार फिर देशवासियों के सामने ला खड़ा किया। हालांकि अब आधिकारिक तौर पर स्पष्ट है कि फिल्म का उनकी वास्तविक कहानी से कोई संबंध नहीं है, लेकिन यह तथ्य भी उतना ही सशक्त है कि मेजर मोहित शर्मा की वास्तविक जिंदगी किसी भी फिल्मी कहानी से कहीं ज्यादा प्रेरणादायक, रोमांचक और अतुलनीय वीरता से भरी हुई है।
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