पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख इन दिनों अमेरिका को “खुश” करने में जुटे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से वहां जोरदार लॉबिंग की जा रही है ताकि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारी जा सके। इसके लिए हर महीने करीब 50,000 डॉलर (लगभग 45 लाख रुपये) खर्च किए जा रहे हैं और अब तक 9 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम लॉबिंग पर झोंकी जा चुकी है। हालांकि, इतनी कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान की Gen Z साफ कह रही है—“तुमसे ना हो पाएगा।”
FARA (Foreign Agents Registration Act) से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि पाकिस्तान सरकार और उससे जुड़े थिंक टैंक अमेरिका में अपनी छवि सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर खर्च कर रहे हैं। इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अमेरिका में लॉबिंग और पब्लिक पॉलिसी आउटरीच पर करीब 9 लाख डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये) खर्च किए। इसके अलावा, पाकिस्तानी दूतावास ने अमेरिकी फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटजी ग्रुप LLC से करार किया ताकि अमेरिकी सांसदों, अधिकारियों और नीति निर्माताओं तक सीधी पहुंच बनाई जा सके। मीडिया में नैरेटिव बदलने के लिए कॉर्विस होल्डिंग इंक जैसी अमेरिकी कंपनी की सेवाएं भी ली गईं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रभावित करने के लिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका दौरे के दौरान रेयर अर्थ मिनरल्स भी गिफ्ट किए। इसके बाद रेयर अर्थ मिनरल्स और मेटल्स को लेकर पाकिस्तान और अमेरिका के बीच एक करार हुआ। दस्तावेजों के मुताबिक, खोज, माइनिंग, प्रोसेसिंग और ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़े इस समझौते की संभावित कमर्शियल वैल्यू करीब 1 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 8.9 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
Please read this brilliant article by Zorain Nizamani, a PhD student at the University of Arkansas, in which he bluntly tells Pakistan’s ruling elite that Gen Z is no longer falling for their attempts to manipulate and control narratives.
Not surprisingly, this article is no… pic.twitter.com/EV7nFWeQyt
— Mehlaqa Samdani (@MehlaqaCAPJ) January 1, 2026
लेकिन बुजुर्ग हुक्मरानों की इन तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, उन्हें देश के लिए “बेकार” बता रही है। देशभर में बढ़ते विरोध और गुस्से के बीच सेना और सत्ता प्रतिष्ठान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि एक वायरल लेख ने सेना को इतना विचलित कर दिया कि उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटवाना पड़ा।
यह लेख अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसस में पीएचडी कर रहे पाकिस्तानी छात्र जोरैन निजमानी का था, जिसका शीर्षक था “It Is Over”। यह लेख 1 जनवरी को पाकिस्तान के जाने-माने अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के डिजिटल एडिशन पर प्रकाशित हुआ था, लेकिन कुछ ही घंटों में इसे हटा दिया गया। आरोप है कि यह कदम पाकिस्तानी सेना के दबाव में उठाया गया। लेख हटाए जाने के बाद इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और Gen Z के बीच जोरैन निजमानी एक तरह से ‘हीरो’ बन गए।
लेख में साफ कहा गया था कि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी अब पुराने नेताओं और उनके झूठे दावों पर भरोसा नहीं करती। लेखक के मुताबिक, “आप जितनी चाहें लड़ाइयाँ करवा लें, Gen Z उस पर मीम बनाएगा। मेनस्ट्रीम मीडिया को सेंसर कर दीजिए, युवा अपनी बात कहने के लिए यूट्यूब, रंबल और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे।” लेख में यह भी कहा गया कि अब विचारों को सेंसर नहीं किया जा सकता और लोगों को बेवकूफ बनाने के दिन खत्म हो चुके हैं।
निजमानी ने लिखा कि जबरन थोपी गई देशभक्ति अब काम नहीं करती। देशभक्ति भाषणों, नारों या प्रायोजित सेमिनारों से नहीं सिखाई जा सकती। यह तब अपने आप पैदा होती है, जब नागरिकों को बराबर मौके, भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर, काम करने वाले सिस्टम और सुरक्षित अधिकार मिलते हैं। उन्होंने कहा कि जब बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं, तब लोगों को देश से जुड़ाव सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती।
लेख में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी हालात समझ रही है, लेकिन डर के माहौल में खुलकर बोल नहीं पा रही। कई युवा देश छोड़ने का रास्ता चुन रहे हैं, क्योंकि उन्होंने देखा है कि आवाज उठाने वालों को चुप करा दिया जाता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जानकारी तक पहुंच आसान बना दी है, इसलिए अब सोच को कंट्रोल करना संभव नहीं रहा।
लेख हटाए जाने का पाकिस्तान में व्यापक विरोध हो रहा है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की कनाडाई विंग ने कहा कि यह कदम साबित करता है कि जबरदस्ती की देशभक्ति फेल हो चुकी है। मानवाधिकार संगठनों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया।
आज पाकिस्तान की हालत यह है कि बलूचिस्तान, पीओके समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। महंगाई चरम पर है, अर्थव्यवस्था बदहाल है और आम जनता को दो वक्त की रोटी तक मुश्किल से नसीब हो रही है। ऐसे में सत्ता में बैठे लोगों की ऐशो-आराम भरी जिंदगी देखकर Gen Z का गुस्सा और भड़क रहा है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान अब एक ऐसे दौर में खड़ा है जहां युवा पीढ़ी चुप रहने के मूड में नहीं है और विचारों की यह बगावत हुक्मरानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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