भारत के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि सामने आई है। DRDO और भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को मिली चीन की खतरनाक PL-15E Missile के अहम तकनीकी रहस्यों को समझने में सफलता हासिल की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मिसाइल पिछले साल पंजाब में सुरक्षित हालत में मिली थी, जिसके बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने करीब एक साल तक इसकी गहन जांच की।
लैब में खुली मिसाइल की तकनीक
वैज्ञानिकों ने मिसाइल के राडार सीकर, कम्युनिकेशन सिस्टम और एंटी-जैमिंग तकनीक का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में यह समझा गया कि यह मिसाइल अपने लक्ष्य को कैसे पहचानती और ट्रैक करती है।
बताया जा रहा है कि मिसाइल में सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम नहीं था, जिसके कारण इसे सुरक्षित रूप से प्राप्त कर अध्ययन करना संभव हुआ।
भारतीय विमानों को मिला बड़ा फायदा
इस तकनीकी जानकारी को भारतीय लड़ाकू विमानों के इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम में शामिल किया गया है। इससे अब Rafale Fighter Jet, Sukhoi Su-30MKI और HAL Tejas जैसे विमान संभावित खतरों को बेहतर तरीके से पहचान और प्रतिक्रिया दे सकेंगे।
मिसाइल की क्षमता और महत्व
PL-15E Missile को लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल माना जाता है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 145 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह उच्च गति (मैक 5 तक) से लक्ष्य को भेदने के लिए डिजाइन की गई है।
वैश्विक रणनीतिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीकी समझ से वायु सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलती है। आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक और राडार आधारित तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
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