दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 की शाम हुए भीषण धमाके के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है। जांच एजेंसियों को इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ होने का शक है। इस हमले में आत्मघाती हमलावर उमर नबी की पहचान हो चुकी है, जिसका पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित आतंकी नेटवर्क से सीधा संबंध बताया जा रहा है।
भारतीय एजेंसियों की शुरुआती जांच रिपोर्ट और खुफिया इनपुट सामने आने के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को गुप्त ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया है। बताया जा रहा है कि हाफिज सईद को रावलपिंडी के पास एक सैन्य सेफ हाउस में रखा गया है, जबकि मसूद अजहर को बहावलपुर के नजदीक किसी अज्ञात स्थान पर छिपाया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से उठाया गया है, क्योंकि दिल्ली ब्लास्ट के बाद भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों की गतिविधियाँ सीमाओं पर बढ़ गई हैं।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान यात्रा के दौरान दिल्ली धमाके पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि “इस हमले के जिम्मेदारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी और आईएसआई के वरिष्ठ अफसर इस समय बेहद दबाव में हैं और उन्हें भारत की संभावित सर्जिकल स्ट्राइक या “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” जैसी जवाबी कार्रवाई का डर सता रहा है।
इस बीच, भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इस धमाके की अंतरराष्ट्रीय साजिश, फंडिंग चैनल और आतंकी नेटवर्क की कड़ियों की बारीकी से जांच कर रही हैं। NIA, RAW और IB की संयुक्त टीम ने कई संदिग्ध खातों और विदेश से आने वाले फंड के लेनदेन को खंगालना शुरू कर दिया है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि दिल्ली ब्लास्ट को किस तरह JeM के स्थानीय मॉड्यूल और पाकिस्तान से जुड़े मास्टरमाइंड्स ने मिलकर अंजाम दिया।
कुल मिलाकर, दिल्ली धमाके के बाद भारत ने सुरक्षा मोर्चे पर सख्ती बढ़ा दी है, जबकि पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत की संभावित कार्रवाई दोनों से घिरता नजर आ रहा है।
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