देश के विधायी और राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण संसद का शीतकालीन सत्र इस वर्ष 1 दिसंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने शनिवार, 8 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी औपचारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सत्र 19 दिनों तक चलेगा, जिसमें कुल 15 बैठकें आयोजित की जाएँगी।
रिजिजू ने कहा कि सरकार इस सत्र को “रचनात्मक और सार्थक बहसों” का मंच बनाना चाहती है, जहाँ जनता की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने वाले मुद्दों पर चर्चा हो सके और लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक मजबूत किया जा सके। संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी की जा रही है।
The Hon’ble President of India Smt. Droupadi Murmu ji has approved the proposal of the Government to convene the #WinterSession of #Parliament from 1st December 2025 to 19th December, 2025 (subject to exigencies of Parliamentary business).
Looking forward to a constructive &… pic.twitter.com/QtGZn3elvT
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) November 8, 2025
इस शीतकालीन सत्र में जिन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है, उनमें संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और संविधान (130वां संशोधन) विधेयक विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा, जन विश्वास (Public Trust) विधेयक और इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी (Insolvency and Bankruptcy) विधेयक भी चर्चा के मुख्य केंद्र रहेंगे। इन विधेयकों के पारित होने से देश के प्रशासनिक ढाँचे, न्याय व्यवस्था और आर्थिक सुधारों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यह सत्र न केवल वर्ष 2025 का अंतिम सत्र होगा, बल्कि इसे आगामी राज्य विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल इस सत्र में अपने विकास और सुधार एजेंडे को गति देगा, जबकि विपक्ष सरकार को विभिन्न नीतिगत और सामाजिक मुद्दों पर घेरने की रणनीति अपनाएगा।
सत्र के दौरान सरकार की प्राथमिकता कानून सुधार, आर्थिक स्थिरता, और प्रशासनिक पारदर्शिता पर रहेगी, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महँगाई और चुनावी मुद्दों को लेकर संसद में जोरदार बहस की तैयारी में है। इस प्रकार, दिसंबर का यह सत्र संसद के इतिहास में संवाद, नीति निर्माण और राजनीतिक मंथन का प्रमुख पड़ाव बनने जा रहा है।
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