राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट 2025 में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर भारत के विकास को लेकर कई अहम बातें कहीं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्वोत्तर नीति – “Act East, Act First, Act Fast” – के केंद्र में हैं।
मुख्य घोषणाएं और आंकड़े:
- ₹4 लाख करोड़ की योजना को पूर्वोत्तर राज्यों के लिए स्वीकृति मिली।
- पिछले 10 वर्षों में विकास दर 12%, जो वैश्विक औसत से 5 गुना ज्यादा है।
- हाइड्रोपावर क्षमता:
- संभावना: 60,000 से 1,00,000 मेगावाट
- वर्तमान उत्पादन: केवल 2,500 मेगावाट
- हाइड्रो सेक्टर में विशाल निवेश की तैयारी।
रोजगार और जनसांख्यिकी लाभ (Demographic Dividend):
- उत्तर पूर्व की आबादी: लगभग 4 करोड़
- औसत साक्षरता दर: 85% (कुछ राज्यों में 95% तक)
- 65% जनसंख्या 30 वर्ष से कम आयु की
- सिंधिया का दावा:
“अगर प्रस्तावित निवेश का 50% भी लागू हो जाए, तो रोजगार के अवसरों की कल्पना नहीं की जा सकती।”
पूर्वोत्तर को ‘भारत का खजाना’ बताया:
- “यह भूमि कभी भारत की GDP में 20% योगदान देती थी।”
- पिछले दशकों की सरकारें इसे पहचान नहीं पाईं, लेकिन पीएम मोदी ने इसे अपनाया।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी:
- अगरतला और गुवाहाटी को अंतरराष्ट्रीय गेटवे बनाने की योजना
- पूर्वोत्तर को एशिया से जोड़ने वाला प्रवेशद्वार बनाया जाएगा।
सुरक्षा और भावनात्मक एकता:
- “सुरक्षा, सुगमता, ऊर्जा, उत्सुकता” जैसे शब्दों से पूर्वोत्तर की पहचान।
- युवाओं से संवाद के बाद सिंधिया बोले:
“अगर पृथ्वी पर कोई स्वर्ग है, तो वह आज का उत्तर पूर्व है।”
- केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, भावनात्मक जुड़ाव भी महत्वपूर्ण:
“तमिलनाडु-काशी संगम की तरह हर राज्य को जोड़ा जाएगा।”
निष्कर्ष:
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर राज्यों को अब राष्ट्रीय विकास में केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेता के रूप में देखा जा रहा है।
इस रणनीति का उद्देश्य है:
- रोजगार का विस्फोट
- ऊर्जा स्वतंत्रता
- भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती