राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को गोरखपुर के खोराबार मैदान में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए सूर्य नमस्कार और प्राणायाम को संकीर्ण धार्मिक दृष्टि से न देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय के लोग पर्यावरण संरक्षण की भावना से नदियों और पेड़ों की पूजा करें, सूर्य नमस्कार करें या प्राणायाम अपनाएं, तो इसमें किसी का क्या नुकसान होगा।
होसबाले ने कहा कि प्रकृति पूजा और पर्यावरण संरक्षण भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और ये अभ्यास किसी भी धर्म के व्यक्ति के लिए हानिकारक नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS किसी भी समुदाय को अपना दुश्मन नहीं मानता और समाज तथा राष्ट्र के कल्याण के लिए समावेशिता में विश्वास करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ किसी से यह अपेक्षा नहीं करता कि वह अपनी पूजा-पद्धति या नमाज़ छोड़ दे। सूर्य नमस्कार को उन्होंने वैज्ञानिक और स्वास्थ्य-उन्मुख अभ्यास बताया, जिससे किसी को कोई नुकसान नहीं होता।
उपासना पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हमारे पूर्वज और मूल एक ही हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी
संतकबीरनगर। हिन्दू समाज की एकता, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंगलवार को जनपद में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय… pic.twitter.com/bs0xNZsDSs
— VSK BHARAT (@editorvskbharat) December 16, 2025
संस्कृति और राष्ट्र निर्माण पर जोर देते हुए होसबाले ने कहा कि भारतीय संस्कृति सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति सम्मान पर आधारित है। पूजा के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन धर्म जीवन जीने की कला सिखाता है। उन्होंने ‘हिंदू-हिंदुत्व’, ‘राष्ट्र-राष्ट्रीयता’ और ‘भारत-भारतीयता’ जैसे विषयों पर बात करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार चरित्र निर्माण है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि योग आज पूरी दुनिया द्वारा अपनाया जा रहा है।
होसबाले के इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि नमाज़ को भी योग का एक रूप माना जाए, तो क्या RSS नेता नमाज़ अदा करना पसंद करेंगे? उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता हर व्यक्ति का अधिकार है और यह तय करना कि कौन क्या करेगा, किसी और का काम नहीं है।
धार्मिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि यदि प्राणायाम और सूर्य नमस्कार में कोई बुराई नहीं है, तो RSS नेता भी उनके साथ नमाज़ पढ़ें। उन्होंने नमाज़ को भी एक तरह की एक्सरसाइज बताया।
RSS महासचिव के इस बयान ने एक बार फिर धर्म, संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां संघ इसे सांस्कृतिक और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय बता रहा है, वहीं विपक्षी दल और धर्मगुरु इसे धार्मिक आज़ादी के नजरिये से देख रहे हैं।
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