उत्तर प्रदेश एटीएस ने शुक्रवार, 7 नवंबर 2025, को ग्रेटर नोएडा में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की साजिश का पर्दाफाश किया। एटीएस ने इस्तांबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और हकीकत प्रिंटिंग पब्लिकेशन नामक संस्थानों पर छापेमारी की और इस दौरान फरहान नबी सिद्दीकी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। फरहान पर आरोप है कि वह अलग-अलग धर्मों के बीच नफरत फैलाने वाली किताबें प्रकाशित करता था, आतंकियों को फंडिंग पहुँचाता था, और भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहा था।
एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें कासना स्थित एक कंपनी के बारे में गुप्त सूचना मिली थी जो समाज में वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से धार्मिक रूप से भड़काऊ सामग्री छापकर वितरित करती थी। जब एटीएस ने छापेमारी की, तो वहाँ से कई संदिग्ध दस्तावेज़, विदेशी फंडिंग के प्रमाण और कुछ डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
गिरफ्तार आरोपी फरहान नबी सिद्दीकी, इस्तांबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड का सह-निदेशक है। जांच में खुलासा हुआ है कि सिद्दीकी और उसके सहयोगी हकीकत वक्फी फाउंडेशन, रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड समेत कई संस्थाएँ चला रहे थे। इन संस्थाओं का इस्तेमाल हिंदी, उर्दू, अरबी और बंगाली भाषाओं में भड़काऊ किताबें प्रकाशित और प्रसारित करने के लिए किया जा रहा था, जिनका मकसद धार्मिक आधार पर नफरत फैलाना था।
जांच में यह भी सामने आया कि इन संगठनों के जरिये हवाला और अन्य अवैध माध्यमों से विदेशी फंडिंग जुटाई जाती थी। एटीएस का मानना है कि करीब 11 करोड़ रुपए की रकम का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में मदरसे और मस्जिदों के लिए जमीन खरीदने में किया गया। इसके अलावा, सिद्दीकी पर यह भी आरोप है कि उसने कई बांग्लादेशी घुसपैठियों को शरण दी थी।
सूत्रों के अनुसार, इस्तांबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तीन लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड थी — फरहान नबी सिद्दीकी, उसका भाई, और तुर्की का एक नागरिक। कंपनी में प्रकाशित किताबों पर “हुसैन हिल्मी इशिक” का नाम लिखा जाता था। हालांकि किताबों का प्रकाशन बहुत बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा था, बल्कि प्रकाशन का काम आतंक से जुड़ी अवैध गतिविधियों को छिपाने का जरिया था।
एटीएस को यह भी पता चला है कि इन संस्थाओं से जुड़े लोग अहमद, मेहमेत और फैजान नामक व्यक्तियों के संपर्क में थे, जिनकी अब तलाश की जा रही है। जांच में यह संकेत मिले हैं कि इन मुखौटा कंपनियों और फाउंडेशन के जरिये भारत के खिलाफ किसी बड़े आतंकी षड्यंत्र की योजना तैयार की जा रही थी।
फिलहाल एटीएस ने फरहान नबी सिद्दीकी से गहन पूछताछ शुरू कर दी है और विदेशी फंडिंग, आतंकी नेटवर्क और संभावित हमले की साजिश से जुड़ी जानकारियाँ खंगाली जा रही हैं। मामला अब राज्य और केंद्र की खुफिया एजेंसियों के लिए उच्च प्राथमिकता का विषय बन गया है।
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