पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारण हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। क्षेत्र के प्रमुख शहरों में बाजार, सार्वजनिक परिवहन और कारोबारी गतिविधियाँ प्रभावित हैं। मुख्य सड़कों को बंद किए जाने, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और आवागमन में बाधाओं के कारण स्थानीय लोगों को भोजन, दवाओं और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों, ट्रक चालकों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान के अधिकारी आवश्यक सामान लेकर PoK जाने वाले वाहनों को जानबूझकर रोक रहे हैं। उनका दावा है कि विरोध आंदोलन को कमजोर करने के लिए क्षेत्र में खाद्य सामग्री, मेडिकल सप्लाई और पेट्रोल-डीजल की आवाजाही बाधित की जा रही है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। हालांकि, रिपोर्टों में मुख्य मार्गों की बंदी, पेट्रोल पंपों पर रोक और बाजारों के सीमित समय तक खुलने की पुष्टि हुई है।
मुजफ्फराबाद और रावलकोट में जनजीवन ठप
PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद के व्यावसायिक क्षेत्रों में अधिकांश दुकानें और कारोबार बंद हैं। सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप होने के कारण दैनिक मजदूरों, टैक्सी चालकों और छोटे दुकानदारों की आय पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इंटरनेट और सैटेलाइट सेवाएँ बंद किए जाने से एटीएम तथा बैंकिंग सेवाएँ भी प्रभावित हुई हैं।
रावलकोट विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हजारों JAAC समर्थक शहर के बाहरी क्षेत्रों में धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि उनकी राजनीतिक, आर्थिक और संवैधानिक माँगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इंटरनेशनल, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों से भी क्षेत्र के हालात पर ध्यान देने की अपील की है।
'Pakistani Army, Get Out!' echoes across Rawalakot and other parts of #PoJK as men, women, and even children take to the streets demanding freedom from Pakistani control.
Despite crackdowns, arrests, and the heavy presence of security forces, the protests continue to grow.
The…
— KashmirFact (@Kashmir_Fact) June 22, 2026
12 आरक्षित विधानसभा सीटों से शुरू हुआ विवाद
मौजूदा अशांति की प्रमुख वजह PoK विधानसभा की उन 12 सीटों को बताया जा रहा है, जो पाकिस्तान में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के विस्थापित लोगों के लिए आरक्षित हैं। JAAC का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से पाकिस्तान की संघीय सत्ता क्षेत्र की राजनीति और सरकार गठन को प्रभावित करती है।
PoK की 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए 27 जुलाई को प्रस्तावित चुनाव से पहले यह विवाद और तेज हो गया। क्षेत्र की सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया था कि 12 आरक्षित सीटें संवैधानिक रूप से संरक्षित हैं और इन्हें समाप्त करने के लिए संविधान में संशोधन आवश्यक होगा। इसके बाद JAAC ने क्षेत्रव्यापी हड़ताल और विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया।
JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध
PoK प्रशासन ने जून 2026 में संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया। प्रशासन ने संगठन पर सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने, लोगों में असुरक्षा फैलाने और हिंसा भड़काने के आरोप लगाए हैं। JAAC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका आंदोलन आर्थिक राहत, राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक सुधारों के लिए है।
प्रतिबंध के बाद JAAC नेताओं और समर्थकों के खिलाफ गिरफ्तारी अभियान तेज किया गया। 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट है। प्रमुख JAAC नेताओं के खिलाफ देशद्रोह के मामले दर्ज किए गए और उनकी गिरफ्तारी में सहायता देने वालों के लिए इनाम की भी घोषणा की गई।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित करने, इंटरनेट बंद करने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ करने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठन ने मौतों और कथित गैर-न्यायिक कार्रवाई की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
मौतों के आँकड़ों पर अलग-अलग दावे
प्रदर्शनकारी संगठनों और कुछ विपक्षी नेताओं का दावा है कि सुरक्षा कार्रवाई और झड़पों में कम से कम 58 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, इस आँकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। Reuters की 19 जून की रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 24 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें लगभग 20 नागरिक और चार पुलिसकर्मी शामिल थे। AFP ने 17 जून तक 22 मौतों की पुष्टि की थी।
स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने और कुछ मृतकों के शव अपने कब्जे में लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पाकिस्तानी प्रशासन ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पों में चार अधिकारी मारे गए और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।
भोजन, ईंधन और दवाओं का बढ़ता संकट
लगातार बंद, सड़क नाकेबंदी और प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण PoK में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई मेडिकल स्टोर और किराना दुकानें सीमित समय के लिए खुल रही हैं। ईंधन की कमी के कारण परिवहन और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संसाधन रखने वाले परिवार कुछ समय तक संकट का सामना कर सकते हैं, लेकिन दैनिक मजदूरी और छोटे कारोबार पर निर्भर लोगों के लिए स्थिति बेहद कठिन हो गई है। बाजार बंद रहने से रोजगार और आमदनी समाप्त हो रही है, जबकि खाद्य पदार्थों और जरूरी सामान की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है।
पाकिस्तान सरकार पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
PoK में जारी प्रदर्शन पाकिस्तान सरकार के लिए एक गंभीर राजनीतिक और मानवाधिकार चुनौती बन गए हैं। एक ओर पाकिस्तान कश्मीर के दूसरे हिस्से में विरोध-प्रदर्शनों और मानवाधिकारों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है, वहीं दूसरी ओर उसके प्रशासन वाले क्षेत्र में इंटरनेट बंदी, सामूहिक गिरफ्तारियों और बल प्रयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारी आंदोलन समाप्त करने के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था की समीक्षा, गिरफ्तार लोगों की रिहाई, JAAC से प्रतिबंध हटाने, कथित गोलीबारी की स्वतंत्र जाँच और भोजन, दवा तथा ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने की माँग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि ठोस कार्रवाई होने तक रावलकोट और अन्य क्षेत्रों में धरना जारी रहेगा।
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