Trinamool Congress ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी ने सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया है। उनके अलावा Babul Supriyo, राजीव कुमार और कोयल मल्लिक को भी राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा गया है।
इन चारों नामों में मेनका गुरुस्वामी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यदि वे चुनाव जीत जाती हैं तो वह LGBTQ समुदाय से आने वाली भारत की पहली सांसद बन सकती हैं।
कौन हैं मेनका गुरुस्वामी?
Menaka Guruswamy का जन्म 27 नवंबर 1974 को हुआ था। वह सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं और कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में पैरवी कर चुकी हैं।
उन्होंने अपनी पढ़ाई University of Oxford, Harvard Law School और National Law School of India University से की है।
2017 से 2019 के बीच वह न्यूयॉर्क के Columbia Law School में बी.आर. आंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर भी रह चुकी हैं।
धारा 377 केस से मिली वैश्विक पहचान
मेनका गुरुस्वामी ने अपनी पार्टनर और वकील Arundhati Katju के साथ मिलकर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक केस लड़ा था।
2018 में Supreme Court of India ने इस धारा को निरस्त कर दिया और समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद दोनों को दुनियाभर में सराहना मिली और उनका नाम TIME Magazine की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया गया।
कई अहम मामलों में कर चुकी हैं पैरवी
धारा 377 के अलावा मेनका गुरुस्वामी कई महत्वपूर्ण मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर चुकी हैं।
उन्होंने राइट टू एजुकेशन कानून की संवैधानिकता से जुड़े मामले में दलीलें रखीं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 25% आरक्षण के प्रावधान को बरकरार रखा।
इसके अलावा उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में पूर्व एयर चीफ मार्शल एस.पी. त्यागी के लिए भी अदालत में पैरवी की थी।
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