केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को घोषणा की कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दो प्रमुख घटकों – जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट (DPM) ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने का ऐलान किया है।
शाह ने इस फैसले को जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद के “अंत” का संकेत बताया और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एकीकरण नीति की बड़ी सफलता है।
शाह का बयान: ‘कश्मीर में अलगाववाद इतिहास बन चुका’
🚩 अमित शाह ने एक्स (Twitter) पर लिखा:
“मोदी सरकार की एकीकरण नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। मैं इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं और अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म कर दें।”
उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के दृष्टिकोण की बड़ी जीत बताया।
Separatism has become history in Kashmir.
The unifying policies of the Modi government have tossed separatism out of J&K. Two organizations associated with the Hurriyat have announced the severing of all ties with separatism.
I welcome this step towards strengthening Bharat's…
— Amit Shah (@AmitShah) March 25, 2025
क्या है हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और इसका महत्व?
🔹 हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का मुख्य अलगाववादी संगठन था, जिसकी स्थापना 1993 में हुई थी।
🔹 यह संगठन भारत विरोधी आंदोलनों में शामिल था और पाकिस्तान समर्थित संगठनों से जुड़ा हुआ था।
🔹 मोदी सरकार के धारा 370 हटाने के बाद (2019) हुर्रियत की गतिविधियों पर कड़ा प्रहार किया गया।
मोदी सरकार की नीतियों का असर
✅ धारा 370 की समाप्ति के बाद अलगाववादियों पर नकेल
✅ हुर्रियत नेताओं की गिरफ्तारी और आतंक फंडिंग पर शिकंजा
✅ जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण और विकास कार्यों में तेजी
✅ पाकिस्तान समर्थित संगठनों का कमजोर होना