आगरा की दो सगी बहनों की घर वापसी के मामले ने एक बड़े धर्मांतरण गिरोह की साजिश को उजागर किया है। ‘ऑपरेशन अस्मिता’ के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें छह राज्यों से 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों पर लव जिहाद के ज़रिए धर्मांतरण कराने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ISIS जैसे आतंकी संगठनों की तरह काम कर रहा था।
मार्च 2025 में दोनों बहनों के लापता होने की रिपोर्ट आगरा के सदर बाजार थाने में दर्ज हुई थी। वे बिना मोबाइल और सोशल मीडिया पर असली नाम के सक्रियता के गायब हो गई थीं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था। पुलिस को एक ‘कनेक्टिंग रिवर्ट’ नामक इंस्टाग्राम आईडी मिली, जिसके माध्यम से गिरोह तक पहुँचा गया। एक महिला दारोगा ने फेक प्रोफाइल बनाकर संपर्क किया, जिससे गिरोह के लोकेशन की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस की टीमें कोलकाता, दिल्ली, राजस्थान, गोवा, उत्तराखंड और यूपी के विभिन्न हिस्सों में भेजी गईं। चार दिनों तक निगरानी रखने के बाद ऑपरेशन को अंजाम दिया गया और दोनों बहनों को रेस्क्यू कर लिया गया।
परिवार का कहना है कि दोनों बहनें पूरी तरह ब्रेनवॉश हो चुकी थीं। वे न केवल घर में पूजा-पाठ का विरोध करती थीं, बल्कि अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाल रही थीं। चार साल से वे इस गिरोह के चंगुल में फँसी हुई थीं।
इस मामले में एक बड़ी सफलता तब मिली जब ATS और IB ने दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से इस रैकेट के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया। उसकी तलाशी के दौरान उसके घर से बड़ी मात्रा में ऐसी किताबें बरामद की गईं, जिनका उद्देश्य हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना था।
दोनों बहनों की सकुशल वापसी के बाद उनके माता-पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आगरा पुलिस का आभार व्यक्त किया है और कहा है कि उन्होंने उनकी बेटियों को वापस लाकर उनका संसार बचा लिया।