भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम के बीच लंबे समय से चल रहे कानूनी और व्यावसायिक विवाद पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने कहा कि करीब एक दशक से जारी इस तरह के व्यावसायिक विवादों का अब अंत होना चाहिए और पक्षकारों को व्यावहारिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि लंबे समय तक ऐसे विवादों के जारी रहने का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कोर्ट ने कहा- लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान जरूरी
सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक विवादों को अनिश्चित समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। अदालत की टिप्पणी का फोकस इस बात पर रहा कि संबंधित पक्षों को लगातार कानूनी लड़ाई में उलझे रहने के बजाय मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।
यह मामला विजय माल्या और SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम के बीच ऋण वसूली तथा प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों से जुड़ा है।
विशेष PMLA कोर्ट के आदेश को माल्या ने दी चुनौती
विजय माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में विशेष Prevention of Money Laundering Act (PMLA) Court के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कुर्क की गई माल्या की संपत्तियों का इस्तेमाल बैंकों के कंसोर्टियम को बकाया ऋण की वसूली के लिए करने की अनुमति दी गई थी।
माल्या की ओर से इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई गई है और संपत्तियों को बैंकों को सौंपे जाने से जुड़े आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या से संबंधित विभिन्न मामलों में PMLA, Fugitive Economic Offenders Act और संपत्तियों की जब्ती/कुर्की को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में पहले भी कार्यवाही होती रही है। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, माल्या को विशेष PMLA कोर्ट ने 5 जनवरी 2019 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।
ED से मांगी जांच की मौजूदा स्थिति
मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से विजय माल्या के खिलाफ चल रही जांच की मौजूदा स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी है।
अदालत ने संबंधित ED अधिकारी से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अब तक माल्या की कौन-कौन सी संपत्तियां कुर्क की गई हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
इस रिपोर्ट से अदालत को यह समझने में मदद मिलेगी कि कुर्क संपत्तियों में से किन संपत्तियों का इस्तेमाल बैंकों द्वारा अपने बकाया की वसूली के लिए किया जा चुका है या किया जा सकता है।
करीब एक दशक से जारी है माल्या-बैंक विवाद
विजय माल्या से जुड़े बैंक ऋण और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर कई वर्षों से अलग-अलग अदालतों में कानूनी लड़ाई चल रही है। माल्या से संबंधित Fugitive Economic Offenders Act की कार्यवाही भी बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष रही है। दिसंबर 2025 के एक आदेश में हाईकोर्ट ने दर्ज किया था कि माल्या द्वारा Fugitive Economic Offenders Act के तहत आदेश को चुनौती देने वाली अपील लंबित थी।
अब हाईकोर्ट की ताजा टिप्पणी ने इस लंबे विवाद के जल्द और व्यावहारिक समाधान की जरूरत को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
अगली सुनवाई में ED की रिपोर्ट पर रहेंगी नजरें
मामले की अगली सुनवाई में ED द्वारा पेश की जाने वाली जांच की स्टेटस रिपोर्ट और कुर्क संपत्तियों का विवरण महत्वपूर्ण रह सकता है। इसके आधार पर अदालत आगे यह विचार कर सकती है कि बैंकों की ऋण वसूली और माल्या की संपत्तियों से संबंधित विवाद में आगे किस तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए।
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