तारीक रहमान के नेतृत्व में नई Bangladesh Nationalist Party (BNP) सरकार के कार्यभार संभालते ही बांग्लादेश ने भारत के प्रति अपने कड़े रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। महीनों से जारी कूटनीतिक तनाव के बीच ढाका ने भारत में अपनी सभी वीजा सेवाओं को पूरी तरह से बहाल कर दिया है।
अगस्त 2024 के बाद बिगड़े थे रिश्ते
अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास आ गई थी। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक अस्थिरता का हवाला देते हुए वीजा सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं।
इस फैसले से हजारों भारतीय नागरिकों, व्यापारियों और छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेडिकल, बिजनेस और शिक्षा से जुड़े यात्रा कार्यक्रम प्रभावित हुए थे।
भारत का अगला कदम क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देगा? सूत्रों के मुताबिक, भारत भी ‘टिट फॉर टैट’ नीति के तहत जल्द ही बांग्लादेश में अपने सभी भारतीय वीजा आवेदन केंद्र (IVAC) दोबारा खोल सकता है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
तारीक रहमान के सामने संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि तारीक रहमान के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। एक ओर उन्हें घरेलू स्तर पर भारत विरोधी भावनाओं को संतुलित करना है, वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश के आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत जैसे बड़े पड़ोसी के साथ सहयोग भी जरूरी है।
आम नागरिकों और व्यापार को राहत
वीजा सेवाओं की बहाली से दोनों देशों के बीच अरबों रुपये का सीमा पार व्यापार दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है। मेडिकल टूरिज्म के लिए भारत आने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और ढाका-चटगांव में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग के नए दौर की शुरुआत साबित हो सकता है।
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