उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित कथित तौर पर मोहम्मद गौरी के सेनापति शमसुद्दीन की मजार पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई वन विभाग द्वारा अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई। बताया जा रहा है कि इटावा के फिसरवन क्षेत्र में स्थित इस मजार को रात के समय तीन बुलडोजरों की मदद से हटाया गया।
मामले को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने जनवरी माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर वन भूमि पर अवैध कब्जे और मजार के निर्माण का मुद्दा उठाया था। शिकायत के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू की और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
वन विभाग की अदालत ने दिया था बेदखली का आदेश
जानकारी के अनुसार, वन विभाग की ओर से मजार के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया था। विभाग ने मजार से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन कथित तौर पर कोई वैध रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
इसके बाद डीएफओ विकास नायक की अदालत में सुनवाई हुई और वन अधिनियम के तहत बेदखली का आदेश जारी किया गया। केयरटेकर ने इस आदेश के खिलाफ कानपुर वन संरक्षक के समक्ष अपील दायर की थी, लेकिन अपील खारिज होने के बाद मजार को ध्वस्त करने का रास्ता साफ हो गया।
हर साल लगता था उर्स, गुरुवार को जुटती थी भीड़
स्थानीय स्तर पर यह स्थल “बीहड़ वाले सैयद बाबा” के नाम से जाना जाता था। यहाँ प्रतिवर्ष उर्स का आयोजन होने के साथ-साथ हर गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग अकीदत पेश करने पहुंचते थे। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब इन गतिविधियों पर विराम लगने की संभावना जताई जा रही है।
मजार इटावा सफारी पार्क के निकट तथा केदारेश्वर महादेव मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर स्थित बताई जाती है।
ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर भी चर्चा
स्थानीय इतिहास और कुछ ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, वर्ष 1194 में मोहम्मद गौरी और कन्नौज के राजा जयचंद की सेनाओं के बीच हुए संघर्ष में गौरी का सेनापति शमसुद्दीन मारा गया था। हालांकि फिसरवन क्षेत्र में स्थित इस मजार का वास्तविक ऐतिहासिक संबंध उसी व्यक्ति से था या नहीं, इस संबंध में कोई आधिकारिक और प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मजार के निर्माण की सटीक तिथि और वैधानिक स्थिति से जुड़ा कोई प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिला।
VHP ने जताई संतुष्टि
विश्व हिंदू परिषद के इटावा जिला अध्यक्ष अमित दीक्षित ने प्रशासनिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर जांच हुई और नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई। उनका दावा है कि वन भूमि पर अवैध निर्माण होने के कारण विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी।
फिलहाल प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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