ईरान की राजधानी तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। 23 फरवरी को कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज में छात्रों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और असहमति जताई।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट में सैन्य दबाव बढ़ाते हुए ईरान को परमाणु समझौते के लिए चेतावनी दे रहे हैं।
शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी
शरीफ यूनिवर्सिटी में छात्र दोपहर के समय कैंटीन के बाहर इकट्ठा हुए।
छात्रों ने मास्क पहनकर नारेबाजी की।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुराने शाही झंडे लहराए।
निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रों और अर्धसैनिक बल बसिज के बीच झड़प भी हुई।

तेहरान यूनिवर्सिटी
तेहरान यूनिवर्सिटी में हालिया प्रदर्शनों में मारे गए छात्रों की याद में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो बाद में विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
छात्रों ने “औरत, जिंदगी, आजादी” के नारे लगाए।
सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को हटाने की मांग की गई।
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि झड़प के दौरान यूनिवर्सिटी गार्ड्स ने हस्तक्षेप नहीं किया।
अल जहरा यूनिवर्सिटी
केवल छात्राओं की इस यूनिवर्सिटी में भी जोरदार प्रदर्शन हुआ।
छात्राओं ने रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए।
सरकार विरोधी नारों से कैंपस गूंज उठा।
अमेरिका-ईरान तनाव और परमाणु समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि परमाणु समझौता नहीं हुआ तो “वास्तव में बुरी चीजें होंगी।” जिनेवा में बातचीत का अगला दौर प्रस्तावित है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा है कि किसी भी हमले का “कठोर जवाब” दिया जाएगा।
मौतों के आंकड़ों पर विवाद
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार हालिया प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई में 7,015 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 214 सरकारी बलों के सदस्य शामिल हैं।
हालांकि, ईरान सरकार ने जनवरी में 3,117 मौतों की पुष्टि की थी। पहले भी सरकार पर मौतों के आंकड़े कम बताने के आरोप लगते रहे हैं।
क्या खामेनेई सरकार की पकड़ कमजोर हो रही?
लगातार छात्र प्रदर्शनों से संकेत मिल रहा है कि दमन के बावजूद असंतोष खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू विरोध इसी तरह जारी रहे, तो खामेनेई सरकार के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
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