गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद यूसुफ पठान की जमीन विवाद से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस मौना भट्ट की सिंगल बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया कि यूसुफ पठान ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया है और उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित किया।
यह मामला 2012 से शुरू हुआ था, जब पठान ने अपने बंगले के पास 978 वर्ग मीटर की प्लॉट संख्या 90 को 99 साल की लीज पर लेने के लिए वडोदरा नगर निगम में आवेदन दिया था। निगम की स्थायी समिति और आम सभा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन चूँकि यह जमीन बिना नीलामी के दी जानी थी, इसलिए इसे राज्य सरकार की स्वीकृति के लिए भेजा गया। 9 जून 2014 को राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बावजूद यूसुफ पठान ने जमीन पर कब्जा कर लिया और वहाँ चारदीवारी बना दी।
विवाद कई वर्षों तक दबा रहा, लेकिन 2024 में यह मामला फिर से चर्चा में आया। वडोदरा नगर निगम ने पठान को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के लिए कहा। इसके जवाब में पठान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और अपने कब्जे को वैध ठहराने की दलील दी।
कोई आम टोपी वाला हो या फिर तथाकथित सेलिब्रिटी, अवैध कब्जा करना, अतिक्रमण करना भूलते नहीं है ये लोग !
पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान में TMC वाले सांसद यूसुफ पठान ने बड़ोदरा में बरसों से नगर निगम की एक जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है
पहले तो इसने बोला कि मैं कोई जमीन कब्जा नहीं किया… pic.twitter.com/G5ojmwRoNj
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) September 14, 2025
पठान की ओर से वकील ने कहा कि नगर निगम एक स्वतंत्र निकाय है और 1949 के अधिनियम के तहत उसे जमीन पट्टे पर देने का अधिकार है, जिसके लिए राज्य सरकार की मंजूरी लेना आवश्यक नहीं है। उन्होंने संविधान के 74वें संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में राज्य का हस्तक्षेप अनुचित है। साथ ही, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पठान जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य चुकाने के लिए तैयार हैं और पिछले 12 वर्षों तक निगम ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया, क्योंकि विवादित जमीन उनके बंगले के पास थी।
वहीं, राज्य सरकार और नगर निगम के वकीलों ने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी का भी कब्जा वैध नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि पठान ने न तो जमीन का मूल्य चुकाया और न ही कोई कानूनी आदेश उनके पक्ष में था। निगम का कहना था कि अगर पठान वास्तव में इस जमीन को चाहते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक नीलामी में हिस्सा लेना चाहिए, जैसा हर नागरिक करता है।
हाईकोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद पठान का कोई भी कानूनी अधिकार इस जमीन पर नहीं बचा था। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने से किसी को भी अधिकार नहीं मिल जाता।
यूसुफ पठान के बाजार मूल्य चुकाने के प्रस्ताव को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। फैसले में कहा गया कि सांसद और प्रसिद्ध व्यक्ति होने के नाते पठान से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून का पालन करें और समाज को सही संदेश दें। अगर उन्हें कानून तोड़ने के बाद भी विशेष सुविधा दी जाती है, तो इसका गलत असर पड़ेगा।
अंतिम आदेश में कोर्ट ने साफ कहा कि निगम की लापरवाही से भी यूसुफ पठान को कोई लाभ नहीं मिल सकता। उनकी याचिका खारिज कर दी गई और नगर निगम को आदेश दिया गया कि जमीन पर अवैध कब्जा तुरंत हटाया जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि प्रसिद्धि या पद के कारण किसी के लिए अलग नियम नहीं बनाए जा सकते।
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