पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच Kharg Island एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। Iran और United States के बीच बढ़ते टकराव के दौरान अमेरिकी सेना ने इस द्वीप के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि ईरान का दावा है कि हमले के बावजूद द्वीप पर मौजूद तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन तेल भंडारण और निर्यात से जुड़े ढांचों पर हमला नहीं किया गया।
खार्ग द्वीप क्यों है ईरान के लिए इतना महत्वपूर्ण
Kharg Island फारस की खाड़ी में Bushehr तट से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण द्वीप है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का करीब 85–90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है, इसलिए इसे देश की ‘आर्थिक जीवनरेखा’ कहा जाता है।
अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर भारी हमले किए!
ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर यूएस ने सैन्य ठिकानों पर जोरदार बमबारी की।
ट्रंप ने दावा किया—हर मिलिट्री टारगेट को पूरी तरह तबाह कर दिया, लेकिन तेल सुविधाओं को छुआ नहीं।
खार्ग द्वीप ईरान के 90%… pic.twitter.com/iEjfRSZd8C
— One India News (@oneindianewscom) March 14, 2026
यहां गहरे समुद्री बंदरगाह होने की वजह से दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर भी आसानी से लंगर डाल सकते हैं। ईरान के कई बड़े तेल क्षेत्रों से पाइपलाइन के जरिए कच्चा तेल यहां लाया जाता है और फिर टैंकरों के माध्यम से दुनिया भर में भेजा जाता है।
हमले में सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना
ईरान की सरकारी एजेंसी Islamic Republic News Agency के अनुसार, हमले के दौरान द्वीप पर 15 से ज्यादा धमाके सुने गए और कई जगह से धुआं उठता देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों, जोशन सी बेस, एयरपोर्ट कंट्रोल टावर और हेलीकॉप्टर हैंगर को निशाना बनाया गया।
सदियों से रहा है रणनीतिक महत्व
खार्ग द्वीप का महत्व केवल आधुनिक तेल उद्योग तक सीमित नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार यह द्वीप प्राचीन समय से समुद्री व्यापार का अहम केंद्र रहा है।
18वीं सदी में Dutch East India Company ने यहां व्यापारिक चौकी स्थापित की थी, जबकि बाद में ब्रिटिश सेनाओं ने भी कुछ समय के लिए इस द्वीप पर कब्जा किया था।
ईरान-इराक युद्ध में भी बना था टारगेट
1980 से 1988 तक चले Iran–Iraq War के दौरान भी इराक ने कई बार इस द्वीप के तेल टर्मिनलों को निशाना बनाया था। उस समय उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना था, क्योंकि तेल निर्यात ही उसकी सबसे बड़ी आय का स्रोत है।
ऊर्जा इतिहासकार Daniel Yergin ने अपनी किताब The Prize: Thविशेषज्ञों का कहना है कि अगर खार्ग द्वीप के तेल ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ तो इसका असर केवल ईरान ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ेगा।e Epic Quest for Oil, Money & Power में लिखा था कि खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का “नर्व सिस्टम” है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ सकता है तनाव
Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में बाधा डाली गई, तो अमेरिका अपनी रणनीति बदल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खार्ग द्वीप के तेल ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ तो इसका असर केवल ईरान ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ेगा।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ Amir Hatami ने कहा है कि इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर हुए हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा।
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर हमला
ईरान की सरकारी एजेंसी Islamic Republic News Agency के मुताबिक 4 मार्च 2026 को IRIS Dena पर हमला हुआ था। यह हमला Indian Ocean में Galle, Sri Lanka के पास किया गया, जिसमें 100 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई।
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