लक्षद्वीप भारत का खूबसूरत आइलैंड ग्रुप इन दिनों तेजी से टूरिस्ट्स का पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां एयर कनेक्टिविटी में बड़ा इजाफा हुआ है और अब हर महीने 120 से ज्यादा फ्लाइट्स संचालित हो रही हैं।
हालांकि, यहां यात्रा के लिए विशेष परमिट सिस्टम लागू है, जिसके तहत टूरिस्ट्स को पहले से अनुमति लेनी होती है, जिसमें आमतौर पर करीब 10 दिन का समय लगता है।
पर्यावरण और संस्कृति की सुरक्षा के लिए सख्त नियम
लक्षद्वीप में कुल 36 द्वीप हैं, जिनमें से केवल 10 पर ही आबादी है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए सिर्फ 6 द्वीपों पर ही पर्यटन की अनुमति दी गई है।
यह कदम समुद्री जैव विविधता और स्थानीय जनजातीय संस्कृति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बिना परमिट फ्लाइट में बोर्डिंग नहीं
टूरिस्ट्स को ऑनलाइन परमिट के लिए आवेदन करना होता है। अनुमति मिलने के बाद ही यात्रा संभव है।
कोच्चि, गोवा और बेंगलुरु से अगत्ती आइलैंड जाने वाली फ्लाइट्स में बिना परमिट बोर्डिंग की अनुमति नहीं दी जाती।
अगत्ती एयरपोर्ट बना मुख्य गेटवे
अगत्ती एयरपोर्ट लक्षद्वीप का एकमात्र ऑपरेशनल एयरपोर्ट है, जो टूरिस्ट्स के लिए मुख्य प्रवेश द्वार है।
दो साल पहले तक कोच्चि-अगत्ती रूट पर हर महीने लगभग 30 फ्लाइट्स चलती थीं, लेकिन 2024 के बाद यह संख्या बढ़कर 120 से ज्यादा हो गई है।
वर्तमान में हर साल करीब 70,000 टूरिस्ट्स लक्षद्वीप पहुंचते हैं, जबकि मालदीव में यह संख्या लगभग 20 लाख तक है।
सरकार बढ़ा रही इंफ्रास्ट्रक्चर
बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार अगत्ती एयरपोर्ट के रनवे को लंबा करने की योजना बना रही है, ताकि बड़े विमान भी उतर सकें।
इसके अलावा मिनिकॉय आइलैंड पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव है, जिसके लिए DPR तैयार की जा रही है।
नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन का विकास
गोल्ड आइलैंड को प्रीमियम टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया गया है, जहां कोई स्थानीय आबादी नहीं है और रिजॉर्ट्स द्वारा हाई-एंड अनुभव दिया जाता है।
सुहेली आइलैंड को भी टूरिज्म के लिए विकसित किया जा रहा है।
वहीं कवरत्ती में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जहां पैराडाइज रिसॉर्ट को आधुनिक होटल में बदला जा रहा है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel