मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने वैश्विक तेल व्यापार में बड़ा बदलाव करते हुए रुपये में तेल खरीद शुरू कर दी है। इस कदम ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, जहां अधिकांश देश अभी भी डॉलर या युआन पर निर्भर हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियां अब खासतौर पर रूस से तेल खरीद में अमेरिकी डॉलर की निर्भरता कम कर रही हैं और भुगतान रुपये में किया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट तनाव और बदला तेल व्यापार
ईरान द्वारा अमेरिका के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बाद क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं।
खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात ऐसे बन गए हैं कि कई देशों के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ईरान ने अपने सहयोगी देशों—भारत, चीन और रूस—को प्राथमिकता देते हुए उनके जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है।
⚡️ Indian refineries switch to alternative currencies for Russian oil — Bloomberg
India is paying in rupees through overseas accounts, which are then converted into dirhams or yuan to reduce reliance on the U.S. dollar. pic.twitter.com/YFNQeBwUuf
— NEXTA (@nexta_tv) March 25, 2026
रुपये में भुगतान से भारत की रणनीतिक बढ़त
भारतीय कंपनियां अब रुपये में भुगतान कर उसे विदेशी खातों में जमा कर रही हैं, जिसे बाद में यूएई दिरहम या चीनी युआन में बदला जा रहा है।
इस रणनीति से:
- डॉलर आधारित सिस्टम पर निर्भरता घट रही है
- अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम कम हो रहा है
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये की स्थिति मजबूत हो रही है
रूस से 6 करोड़ बैरल तेल की डील
भारत ने अप्रैल 2026 के लिए रूस से करीब 6 करोड़ बैरल तेल खरीदने का फैसला किया है। यह कदम मिडिल ईस्ट संकट के कारण सप्लाई में आई कमी को पूरा करने में मदद करेगा।
यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और डी-डॉलराइजेशन नीति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या डॉलर की दादागिरी खत्म होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम वैश्विक मुद्रा संतुलन को बदल सकता है।
अगर अन्य देश भी इसी रास्ते पर चलते हैं, तो डॉलर की वैश्विक पकड़ कमजोर हो सकती है और रुपये जैसी उभरती मुद्राओं को मजबूती मिल सकती है।
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