अमेरिका में आगामी Midterm Elections से पहले इंडो-अमेरिकन समुदाय में चिंता बढ़ती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 12.5% इंडियन-अमेरिकन वोटिंग से दूर रह सकते हैं, जिसकी मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप की सख्त फोटो वोटर ID पॉलिसी और प्रस्तावित SAVE Act को माना जा रहा है।
अगर सीनेट में SAVE Act पास हो जाता है, तो चुनावों में नागरिकता साबित करने के लिए सख्त दस्तावेज़ दिखाना अनिवार्य हो सकता है, जिससे प्रवासी समुदाय में डर का माहौल है।
क्यों डर में हैं इंडियन-अमेरिकन्स?
टेक्सास और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में रहने वाले कई प्रवासियों को आशंका है कि वोटिंग के दौरान दस्तावेज़ दिखाने पर वे पुलिस या ICE एजेंट्स के रडार पर आ सकते हैं।
- नागरिकता पर सवाल उठने का डर
- अधूरे या पुराने दस्तावेज़ होने की चिंता
- इमिग्रेशन जांच का खतरा
इसी कारण कई लोग इस बार मतदान प्रक्रिया से दूरी बनाने का विचार कर रहे हैं।
H-1B वीज़ा और रोजगार पर असर
ग्रेग एबॉट के नेतृत्व में टेक्सास और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में H-1B वीज़ा नियमों को सख्त किया जा रहा है।
- विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर निगरानी
- एजेंसियों और संस्थानों द्वारा स्पॉन्सरशिप में कमी
- हेल्थकेयर, रिसर्च और एजुकेशन सेक्टर पर संभावित असर
इन बदलावों का सबसे ज्यादा प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है।
प्रवासी भारतीयों की चिंता
टेक्सास के मनजीत सिंह जैसे कई भारतीय, जिन्होंने पहले ट्रंप का समर्थन किया था, अब वोटिंग से दूरी बना रहे हैं। उनका कहना है कि फेडरल अधिकारियों को दस्तावेज़ दिखाना जोखिम भरा हो सकता है।
वहीं फ्लोरिडा के अरुणाभ सैकिया का मानना है कि यह सिर्फ वोटिंग का मुद्दा नहीं, बल्कि इमिग्रेंट्स की पहचान और अधिकारों से जुड़ा मामला है।
बढ़ता तनाव और संभावित असर
- वोटिंग प्रतिशत में गिरावट
- इंडो-अमेरिकन राजनीतिक भागीदारी पर असर
- इमिग्रेशन और नागरिक अधिकारों पर नई बहस
यह पूरा मुद्दा अब अमेरिका की राजनीति और प्रवासी समुदाय के बीच एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel