उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम को राज्य के सभी स्कूलों और महाविद्यालयों में अनिवार्य करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा 10 नवंबर 2025 को गोरखपुर में आयोजित ‘एकता यात्रा/वंदे मातरम’ कार्यक्रम के दौरान की और कहा कि यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की एकता व अखंडता का प्रतीक है; इसलिए इसे विद्यालयीन-शैक्षणिक वातावरण का नियमित हिस्सा बनाया जाएगा।
CM ने यह भी जोर दिया कि देश की एकता को विभाजित करने वाले तत्वों की पहचान कर उन्हें रोका जाना आवश्यक है और “कोई नया जिन्ना” पैदा न हो—यह कदम राष्ट्रीय एकता की भावना बढ़ाने और छात्र-युवाओं में देशभक्ति स्थापित करने के उद्देश्य से बताया गया है।
शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गये हैं कि सरकारी और निजी दोनों तरह की शैक्षणिक संस्थाओं में वंदे मातरम के नियमित पाठ/गायन की व्यवस्था करायी जाए; इस घोषणा को देश में वंदे मातरम के 150 वर्ष और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के संदर्भ में भी पेश किया गया।
सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएँ भी दिख रही हैं — समर्थक इसे राष्ट्रवाद की मजबूती मान रहे हैं जबकि आलोचक इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक-सांस्कृतिक बहुलता के संदर्भ में बहस का विषय बता रहे हैं; आगे के क्रियान्वयन और आदेशों के साथ इस पर और स्पष्टता आने की संभावना है।
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