धर्मस्थल विवाद मामले में अब NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) से जाँच की माँग तेज होती जा रही है। हाल ही में कर्नाटक के कई मठों के पीठाधीशों ने दिल्ली पहुँचकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने गृह मंत्री को बताया कि धर्मस्थल में जो घटनाएँ सामने आई हैं, वे केवल एक साधारण विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकती हैं।
दरअसल, धर्मस्थल में एक व्यक्ति ने दावा किया था कि वहाँ सैकड़ों शव दफनाए गए हैं, जिनमें महिलाओं के शव भी शामिल थे। इतना ही नहीं, इन शवों पर यौन उत्पीड़न के संकेत भी बताए गए। पीठाधीशों का कहना है कि यह केवल धर्मस्थल तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि हिंदू धार्मिक स्थलों को बदनाम करने की साजिश हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने केंद्र से माँग की कि इसकी जाँच SIT नहीं, बल्कि NIA से करवाई जाए, ताकि सच देश के सामने आ सके।
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ಧರ್ಮಸ್ಥಳ ವಿರುದ್ಧ ಅಪಪ್ರಚಾರ ಸಂಬಂಧ ಕೇಂದ್ರ ಗೃಹ ಸಚಿವರ ಭೇಟಿಯಾದ ಕರ್ನಾಟಕದ ಮಠಾಧೀಶರು#DharmasthalaCase #AmitShah #Karnataka #NIA #Dharmasthala pic.twitter.com/aMCQk73z6D
— Ritam ಕನ್ನಡ (@RitamAppKannada) September 4, 2025
हालाँकि, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस पर आपत्ति जताई है। राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने साफ कहा कि राज्य सरकार पहले ही एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन कर चुकी है और जाँच जारी है। ऐसे में NIA को शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनका तर्क है कि SIT को अपनी जाँच पूरी करने दी जानी चाहिए और अगर उसमें कोई कमी पाई जाती है तो राज्य सरकार उस पर विचार करेगी।
जी परमेश्वर ने सवाल उठाया कि जब SIT पहले से काम कर रही है तो अब धार्मिक नेता NIA जाँच की माँग क्यों कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में NIA जाँच का औचित्य साबित होता है, तो सरकार उस पर विचार कर सकती है, लेकिन फिलहाल यह ज़रूरी नहीं है।
गौर करने वाली बात यह है कि धर्मस्थल विवाद तब उभरा जब सी एन चिन्नैया नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उसने खुद सैकड़ों शव दफनाए हैं और उनमें यौन उत्पीड़न के निशान थे। लेकिन बाद में उसे झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद विवाद थमा नहीं और अब यह मामला राजनीतिक और धार्मिक टकराव का केंद्र बन गया है।
NIA जाँच की माँग और राज्य सरकार के विरोध के बीच यह मुद्दा अब केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह वाकई सिर्फ एक स्थानीय विवाद है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक और धार्मिक साजिश छिपी है।
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