महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने रविवार (23 नवंबर 2025) को ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। गढ़चिरोली जिले के फुलनार गाँव में 24 घंटे तक चले अभियान के बाद सुरक्षा बलों ने एक मजबूत और पूर्ण विकसित पुलिस कैंप स्थापित कर दिया। यह वही इलाका है, जो वर्षों तक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) का मुख्य ठिकाना रहा और जहाँ माओवादी अपनी तथाकथित ‘जनताना सरकार’ और समानांतर न्याय प्रणाली चलाते थे। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और घने जंगलों वाले क्षेत्र में यह अब तक की सबसे गहरी सुरक्षा पैठ मानी जा रही है।
गुंदुरवाही के नाम से स्थापित यह कैंप प्रतीकात्मक दृष्टि से भी बेहद अहम है, क्योंकि यहीं पर माओवादी मनमानी फैसले सुनाते थे और आम ग्रामीणों पर आतंक का शासन चलाते थे। यह सफलता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस लक्ष्य को मजबूत करती है जिसके तहत वर्ष 2026 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि हथियारबंद नक्सलियों से कोई बातचीत नहीं होगी—जो मुख्यधारा में लौटेंगे, वही पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
फुलनार और उसका आसपास का इलाका पहले इतना खतरनाक था कि बारिश के मौसम में सात महीनों तक परलकटा नदी के उफान के कारण यहाँ पहुँचना संभव ही नहीं होता था और शेष महीनों में PLGA की बंदूकें सुरक्षा बलों को रोक देती थीं। अब इसी स्थान पर तिरंगा गर्व से लहरा रहा है। अभियान में 1,050 से अधिक सुरक्षा कर्मियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 1,000 C-60 कमांडो, CRPF के जवान, 500 स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) और 21 बम निरोधक टीम शामिल थीं। भारी तकनीकी उपकरणों की मदद से रात-दिन काम कर 12 पोर्टा-केबिन, RO प्लांट, वाई-फाई, वॉच टावर, बंकर और पावर बैकअप जैसे सभी सुविधाओं वाला आधुनिक ऑपरेशनल बेस तैयार किया गया।
यह वही इलाका है जहाँ PLGA की कुख्यात कंपनी नंबर–10 का दबदबा था और जहाँ 2016 में C-60 कमांडो का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने इस समूह के चार कुख्यात नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया है, जिससे संगठन की पकड़ कमजोर पड़ी है।
सबसे बड़ी सकारात्मक बदलाव यह रहा कि जहाँ एक समय ग्रामीण पुलिस की मौजूदगी का कड़ा विरोध करते थे, वहीं अब सुरक्षा बलों का स्वागत करते दिखाई दिए। आसपास के 10 गाँवों से आए 300 से अधिक आदिवासी नागरिकों ने कैंप के उद्घाटन में भाग लिया। मौके पर ADG (स्पेशल ऑपरेशन) चेरिंग दोरजे और गढ़चिरोली के SP नीलोत्पल भी मौजूद रहे।
SP नीलोत्पल ने उम्मीद जताई कि सुरक्षा मजबूत होने के साथ विकास के बंद दरवाजे अब फिर खुलेंगे—सड़क, पुल, मोबाइल टावर, स्वास्थ्य केंद्र जैसे रुके हुए प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेंगे। भविष्य में यहाँ राज्य परिवहन की बसें भी चलाई जाएँगी जिससे महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बीच आवाजाही और व्यापार सुगम होगा।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों को साड़ियाँ, कंबल, बर्तन, स्कूल किट, खेल सामग्री, खाद्य सामग्री और मच्छरदानियाँ वितरित कीं। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और शांति के लाभों की जानकारी दी। यह पहल न केवल क्षेत्र में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करेगी बल्कि वर्षों से उपेक्षित जनजीवन में विकास और सामान्यcy लौटाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel