22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने न केवल भारत को झकझोर दिया है, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान खींचा है। इस हमले के संबंध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बात की. इस दौरान उन्होंने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की. उन्होंने इस हमले में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना जताई है. उन्होंने आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को पूरा समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि इस हमले को अंजाम देने वालों और हमले की साजिश रचने वालों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए.यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक ट्वीट में दी है.
President Putin @KremlinRussia_E called PM @narendramodi and strongly condemned the terror attack in Pahalgam, India. He conveyed deepest condolences on the loss of innocent lives and expressed full support to India in the fight against terrorism. He emphasised that the…
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) May 5, 2025
भारत-रूस नेताओं की टेलीफोन पर बातचीत: मुख्य बातें
आतंकी हमले पर रूस की प्रतिक्रिया:
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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की।
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उन्होंने हमले में मारे गए 26 लोगों (25 पर्यटक, 1 स्थानीय) के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
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पुतिन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को पूरा समर्थन देने की बात दोहराई।
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उन्होंने कहा कि हमले के दोषियों और साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।
भारत का रुख:
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भारत ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का आरोप लगाया है।
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देश में भारी जन आक्रोश है, और लोग कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी की बात:
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दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
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प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को रूस के विजय दिवस की 80वीं वर्षगांठ पर शुभकामनाएं दीं।
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पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को भारत में वर्षांत में होने वाले वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।
प्रासंगिकता और संदेश:
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यह संदेश देता है कि रूस, आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ खड़ा है, खासकर ऐसे समय में जब भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करने की कोशिश कर रहा है।
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भारत-रूस संबंधों में राजनीतिक समर्थन, रक्षा सहयोग और वैश्विक मंचों पर समन्वय की निरंतरता बनी हुई है।
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पुतिन का यह समर्थन भारत को सुरक्षा परिषद में और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में नैतिक और कूटनीतिक बल देता है।