दिल्ली धमाके की जाँच के दौरान सामने आए नए खुलासों ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को गंभीर आरोपों के घेरे में ला दिया है। पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार सिद्दीकी पर अब एक बड़े ज़मीन घोटाले, धोखाधड़ी, और संभावित आतंकी फंडिंग से जुड़े होने के आरोपों की जाँच चल रही है। इस पूरे मामले ने दिखाया है कि किस तरह वर्षों पहले मर चुके लोगों के नाम पर जमीनें बेची गईं और करोड़ों की हेराफेरी की गई।
‘मुर्दा लोगों’ की जमीन बेचने का बड़ा फर्जीवाड़ा
जाँच एजेंसियों ने पता लगाया कि नई दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में स्थित एक जमीन को तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन—जो सिद्दीकी से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है—के नाम पर 2013 में 75 लाख रुपये में बेचा गया था। इस लेनदेन के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) का इस्तेमाल किया गया, लेकिन जब दस्तावेजों की जाँच हुई तो बड़ा खुलासा हुआ—
जिन लोगों के नाम और हस्ताक्षर इस GPA पर थे, वे 1972 से 1998 के बीच ही मर चुके थे। इनमें शामिल हैं—
- नाथू (मृत्यु: 1972)
- हरबंस सिंह (मृत्यु: 1991)
- हर्केश (मृत्यु: 1993)
- शिव दयाल (मृत्यु: 1998)
- जय राम (मृत्यु: 1998)
इन मृत व्यक्तियों के नकली हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान, और फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग कर जमीन को फाउंडेशन को ट्रांसफर कर दिया गया। जाँच अधिकारियों का कहना है कि यह लेनदेन “हर स्तर पर अवैध” था—चाहे दस्तावेजों की उत्पत्ति हो, मृत व्यक्तियों का उपयोग, या लेनदेन की प्रक्रिया।
जवाद सिद्दीकी का नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की परतें
सिद्दीकी का आर्थिक नेटवर्क बहुत बड़ा और जटिल बताया जा रहा है। वह शिक्षा, सॉफ्टवेयर, ट्रैवल, कैटरिंग और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कम-से-कम 15 कंपनियों में शामिल है।
ED की जाँच में शक है कि—
- अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर आने वाला पैसा,
- विभिन्न फर्जी प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट, और कैटरिंग भुगतान के बहाने
सिद्दीकी के परिवार से जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर होता था।
यह पैसा आगे कैसे इस्तेमाल होता था, इसकी पूरी बैंकिंग ट्रेल की जाँच हो रही है। शुरुआती जांच में यूनिवर्सिटी द्वारा मान्यता (accreditation) के झूठे दावे करने और प्रशासन को गुमराह करने के सबूत भी मिले हैं।
क्या है दिल्ली धमाके से कनेक्शन?
हालांकि सिद्दीकी या अल-फलाह यूनिवर्सिटी का सीधा संबंध दिल्ली धमाके से अभी साबित नहीं हुआ है, लेकिन जांच एजेंसियों ने कई बिंदुओं को गंभीरता से लेना शुरू किया है। धमाका करने वाले डॉ. उमर उन नबी और उसके साथियों की पढ़ाई और गतिविधियों के यूनिवर्सिटी से संबंध की जांच जारी है।
एजेंसियों को शक है कि—
- यूनिवर्सिटी के नाम पर चलने वाला भारी-भरकम फंडिंग नेटवर्क
- उसके ट्रस्ट के माध्यम से आने वाली रकम
कहीं आतंकी मॉड्यूल, कट्टरपंथियों, या अवैध गतिविधियों तक तो नहीं पहुंचाई जाती थी।
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