चक्रवात ‘दितवाह’ (Cyclone Ditwah) बंगाल की खाड़ी में बना एक बेहद शक्तिशाली तूफान है, जिसने सबसे पहले श्रीलंका को अपनी चपेट में लेकर भारी विनाश किया। वहाँ 120 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई हजार लोग बेघर हो गए हैं। तेज बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की वजह से पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हालात इतने खराब हैं कि करीब 44,000 लोगों को सुरक्षित शिविरों में भेजना पड़ा, स्कूल बंद कर दिए गए और राजधानी कोलंबो में शेयर बाजार तक समय से पहले बंद करना पड़ा।
#WATCH | Rameswaram, Tamil Nadu | Strong winds, rain and rough sea conditions in Pamban as a result of cyclonic storm 'Ditwah' moving north-northwest across Sri Lanka and the southwest Bay of Bengal.
'Ditwah' expected to cross near the coast by early November 30th, says IMD. pic.twitter.com/laSbb10ZOP
— ANI (@ANI) November 28, 2025
अब यह चक्रवात भारत की ओर बढ़ रहा है और सबसे ज्यादा खतरा तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों को है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि बेहद भारी बारिश, तेज़ हवाएँ और तटीय जलभराव की स्थिति बन सकती है। तमिलनाडु के कुड्डालोर जैसे जिलों में प्रशासन ने राहत कैंप तैयार कर लिए हैं और लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। वहीं चेन्नई और आसपास के इलाकों में भी बारिश बढ़ने के कारण ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जिससे उड़ान सेवाओं और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
चक्रवात कैसे बनता है?
चक्रवात समुद्र के ऊपर बनने वाला एक विशाल घूर्णन तूफान है, जिसकी शुरुआत गर्म समुद्री सतह से होती है। जब समुद्र का पानी 26.5°C से ज्यादा गर्म हो जाता है, तो उससे उठने वाली गर्म हवा ऊपर उठती है और नीचे कम दबाव का क्षेत्र बनाती है। आसपास की ठंडी हवा इस खाली जगह को भरने के लिए तेजी से केंद्र की ओर दौड़ती है। पृथ्वी के घूमने (Coriolis Force) की वजह से यह हवा सीधी न आकर गोल-गोल घूमने लगती है। यही घूमता हुआ सिस्टम मजबूत होकर साइक्लोन बन जाता है। चक्रवात ‘दितवाह’ भी इसी प्रक्रिया से बना है।
चक्रवात इतना विनाशकारी क्यों होता है?
चक्रवात तीन स्तर पर बड़े पैमाने पर नुकसान करता है—
(1) तेज हवाएँ: पेड़ उखड़ जाते हैं, बिजली के खंभे टूट जाते हैं और कच्चे-पक्के मकानों को नुकसान होता है।
(2) भारी बारिश: थोड़े समय में ही बाढ़ की स्थिति बन जाती है और खेत, सड़कें और घर जलमग्न हो जाते हैं।
(3) समुद्री लहरें (Storm Surge): तूफान समुद्र का पानी बहुत ऊँचा उठाता है, जिससे तटीय क्षेत्र एकदम से पानी में डूब जाते हैं। यह सबसे बड़ा खतरा होता है।
#OperationSagarBandhu unfolds. @IAF_MCC C-130 J plane carrying approx 12 tons of humanitarian aid including tents, tarpaulins, blankets, hygiene kits, and ready-to-eat food items lands in Colombo.
🇮🇳 🇱🇰 pic.twitter.com/btzlnZeO8x
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) November 29, 2025
श्रीलंका में तबाही और भारत का ‘ऑपरेशन सागर बंधु’
श्रीलंका में ‘दितवाह’ ने अभूतपूर्व नुकसान किया है। इसके बाद भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के विजन SAGAR (Security and Growth for All in the Region) के तहत ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू किया है। भारत ने अपनी नौसेना के आधुनिक जहाजों—जिसमें INS विक्रांत भी शामिल है—के ज़रिए राहत सामग्री, डॉक्टर, भोजन और आपदा राहत टीमें भेजी हैं। यह न सिर्फ मानवीय सहायता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत एक विश्वसनीय और तेज़ मदद पहुँचाने वाला साझेदार है। इस कदम से भारत-श्रीलंका संबंध और मजबूत हुए हैं तथा चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर क्षेत्रीय संतुलन भी कायम हुआ है।
#WATCH कुड्डालोर, तमिलनाडु: चक्रवात 'दितवाह' पर जिला कलेक्टर सिबी अधित्या सेंथिल कुमार ने कहा, "चक्रवात दितवाह को देखते हुए IMD ने कुड्डालोर जिले के लिए बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। जिला प्रशासन ने तैयारी के लिए कई कदम उठाए हैं…हमने 233 राहत सेंटर भी पहचाने हैं जहां… pic.twitter.com/YOMBX4DZ0S
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 28, 2025
भारत में आगे क्या असर होगा?
IMD के अनुसार, चक्रवात 30 नवंबर 2025 की सुबह तक भारत के तटीय इलाकों के पास पहुँच सकता है।
- तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश में भीषण बारिश और 70–90 किमी/घंटा की हवाएँ चलने की आशंका है।
- निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है और पेड़ गिरने, बिजली बाधित होने जैसी स्थितियाँ बन सकती हैं।
- चेन्नई–श्रीलंका के बीच उड़ान सेवाएँ प्रभावित हो गई हैं।
- समुद्र में मछुआरों के जाने पर 1 दिसंबर तक पूर्ण प्रतिबंध है।
कुड्डालोर में 233 राहत शिविर तैयार किए गए हैं और हेल्पलाइन 1077 पर आपात सहायता उपलब्ध है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अगले कुछ दिनों तक बिना जरूरत घरों से बाहर न निकलें और मौसम विभाग की हर सलाह का पालन करें।
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