उत्तराखंड की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उधम सिंह नगर जिले से मोहम्मद सलाउद्दीन नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से युवाओं तक कट्टरपंथी और भड़काऊ सामग्री पहुंचा रहा था। STF का दावा है कि वह लंबे समय से ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने का प्रयास कर रहा था।
इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल पर सक्रिय था आरोपित
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मोहम्मद सलाउद्दीन इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे सोशल मीडिया एवं मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय था। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ऐसे संदेश, वीडियो और पोस्ट साझा कर रहा था जिन्हें भड़काऊ और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि उसकी गतिविधियों पर काफी समय से निगरानी रखी जा रही थी और उसके ऑनलाइन नेटवर्क की भी जांच की जा रही थी।
पाकिस्तान और मलेशिया कनेक्शन की जांच
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह ने बताया कि खुफिया जानकारी में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे आरोपित के विदेशी संपर्कों की आशंका जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलरों से संपर्क और मलेशिया से जुड़े कुछ डिजिटल लिंक सामने आए हैं। हालांकि इन दावों की विस्तृत जांच अभी जारी है और एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
STF ने मोहम्मद सलाउद्दीन को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, धारा 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66(C) और 66(F) के तहत गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपित के खिलाफ भारत-विरोधी गतिविधियों और संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच
जांच एजेंसियों ने आरोपित के कब्जे से मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं। अब इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और वह किन-किन समूहों या व्यक्तियों के साथ संवाद कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से साझा की जा रही सामग्री का दायरा कितना व्यापक था और उसका प्रभाव किन क्षेत्रों तक पहुंचा था।
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मामला
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी सामग्री के प्रसार को गंभीरता से लिया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां आरोपित के डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel