पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने कोलकाता की ऐतिहासिक ट्राम सेवा को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एशिया की सबसे पुरानी ट्राम सेवा को बंद नहीं किया जाएगा। इसके बजाय सरकार इसे आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाओं और पर्यावरण अनुकूल मॉडल के साथ नए स्वरूप में पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रही है।
कोलकाता की ट्राम सेवा केवल एक सार्वजनिक परिवहन साधन नहीं बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। वर्ष 1873 में शुरू हुई यह सेवा पिछले 150 वर्षों से कोलकाता की विरासत का प्रतीक रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ट्रैफिक जाम, परिचालन लागत और शहरी विकास योजनाओं के चलते इसके भविष्य पर सवाल उठने लगे थे।
वर्ष 2024 में तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने ट्रैफिक प्रबंधन का हवाला देते हुए शहर के अधिकांश ट्राम मार्गों को बंद करने का निर्णय लिया था। इस फैसले के पीछे यह तर्क दिया गया था कि व्यस्त सड़कों पर ट्रामों की धीमी गति के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही कई ट्राम डिपो की जमीनों के वैकल्पिक उपयोग की योजनाएं भी सामने आई थीं।
TMC सरकार के इस कदम का पर्यावरणविदों, इतिहासकारों और आम नागरिकों ने व्यापक विरोध किया था। विरोध करने वालों का कहना था कि ट्राम केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि कोलकाता की पहचान और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मामला बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट तक भी पहुंचा था।
अब नई भाजपा सरकार ने इस विरासत को संरक्षित करने और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने बताया कि सरकार ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों में संचालित आधुनिक ट्राम प्रणालियों का अध्ययन कर रही है। इसके तहत हल्की, ऊर्जा-कुशल, कम रखरखाव वाली और प्रदूषण मुक्त नई पीढ़ी की ट्रामों को कोलकाता में लाने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि पहले चरण में बंद हो चुके ट्राम मार्गों का तकनीकी और व्यावसायिक अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद उन रूटों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां ट्राम सेवा को आधुनिक परिवहन प्रणाली के साथ एकीकृत किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य ट्राम को केवल विरासत परियोजना तक सीमित न रखकर उसे शहर के भविष्य के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनाना है।
सरकार की प्राथमिकता ऐतिहासिक एस्प्लेनेड-खिदिरपुर ट्राम रूट को पुनर्जीवित करना है। यह मार्ग कोलकाता की सबसे प्रसिद्ध ट्राम लाइनों में से एक माना जाता है। इसके अलावा ट्राम नेटवर्क को कोलकाता मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों से जोड़ने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक के साथ ट्राम सेवा का पुनर्विकास किया जाता है, तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगी बल्कि पर्यटन और शहरी परिवहन दोनों क्षेत्रों को भी नई दिशा दे सकती है। दुनिया के कई बड़े शहरों में ट्राम को आधुनिक शहरी परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और कोलकाता भी इस दिशा में आगे बढ़ सकता है।
भाजपा सरकार का यह फैसला कोलकाता की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के साथ-साथ सतत और हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि 150 साल पुरानी यह ट्राम सेवा आधुनिक तकनीक के साथ किस रूप में शहर की सड़कों पर वापस लौटती है।
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