पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक संघर्ष अब खुली बगावत में बदल गया है। पार्टी के विद्रोही विधायकों और नेताओं के गुट ने ममता बनर्जी को TMC के अध्यक्ष पद से हटाने का दावा करते हुए वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अपना नया चेयरपर्सन चुन लिया है।
हालांकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस गुट ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है। ममता गुट ने चुनाव आयोग को अपनी नई राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की सूची भी भेजी है, जिसमें ममता बनर्जी को पार्टी की चेयरपर्सन बताया गया है। इसके कारण अब TMC के संगठन, नेतृत्व और चुनाव चिह्न को लेकर बड़ा राजनीतिक तथा कानूनी विवाद खड़ा होने की संभावना है।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद गहराया TMC का संकट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। चुनावी हार के बाद TMC के भीतर नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष सामने आने लगा था।
पार्टी के कई विधायकों ने नेतृत्व पर एकतरफा फैसले लेने और संगठन में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए। धीरे-धीरे यह असंतोष विधायकों के एक बड़े विद्रोही गुट में बदल गया। इस गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिली हुई है।
बागी गुट का दावा है कि उसे TMC के अधिकतर विधायकों और बड़ी संख्या में पूर्व विधायकों, पार्षदों तथा जिला स्तरीय पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि इन दावों पर ममता बनर्जी समर्थक गुट ने सवाल उठाए हैं।
कोलकाता में बागी नेताओं की विशेष बैठक
सोमवार, 22 जून 2026 को कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र स्थित एक होटल में TMC के विद्रोही नेताओं की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक की अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी ने की। बागी गुट के अनुसार बैठक में मौजूदा एवं पूर्व विधायक, जिला अध्यक्ष, पार्षद और अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इसी दौरान वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को सर्वसम्मति से गुट का नया चेयरपर्सन चुना गया। विद्रोही नेताओं ने खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ बताते हुए कहा कि बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि नई कमेटी पार्टी के संविधान और निर्धारित नियमों के अनुसार बनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी चाहें तो नए संगठन में मुख्य सलाहकार की भूमिका निभा सकती हैं।
अरूप रॉय को चेयरपर्सन की जिम्मेदारी
बैठक में हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को बागी गुट का चेयरपर्सन बनाया गया। उन्हें ममता बनर्जी की जगह पर संगठन की कमान सौंपने की घोषणा की गई।
अरूप रॉय ने बैठक के बाद कहा कि उनका गुट वर्ष 1998 से तृणमूल कांग्रेस के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने सामूहिक नेतृत्व और सभी वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेने का भरोसा दिलाया।
बागी नेताओं का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ व्यक्तियों तक सीमित हो गई थी। नई कमेटी का दावा है कि भविष्य में बड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाएंगे।
चार वरिष्ठ नेताओं को बनाया गया उपाध्यक्ष
विद्रोही गुट द्वारा घोषित नई संगठनात्मक संरचना में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
ऋतब्रत बनर्जी, जावेद अहमद खान, संदीपन साहा और बिप्लब मित्रा को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अखरुज्जमान अंसारी को मुख्य कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
नई राष्ट्रीय कार्यसमिति में मोहम्मद गुलाम रब्बानी, स्नेहाशीष चक्रवर्ती, चंद्रनाथ सिन्हा, काजल शेख और प्रसून बनर्जी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है। बागी गुट ने आगामी दिनों में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर की समितियों का गठन करने की भी घोषणा की है।
पार्टी के वित्तीय खातों की जांच कराएगा बागी गुट
नई कमेटी ने तृणमूल कांग्रेस के वित्तीय खातों की जांच के लिए एक विशेष स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने का फैसला किया है। विद्रोही विधायकों ने पार्टी के खातों और धन के उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं।
बागी गुट का कहना है कि स्वतंत्र ऑडिटर पार्टी के वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और चंदे से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगा। हालांकि पार्टी के खातों पर लगाए गए आरोपों की अभी किसी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
ममता गुट ने फैसले को बताया असंवैधानिक
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने बागी नेताओं की बैठक और नई कमेटी को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस बैठक को पार्टी संविधान के विरुद्ध बताया और दावा किया कि ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक नेता हैं।
ममता समर्थक गुट की ओर से कई बागी नेताओं को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। इन नेताओं से पूछा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
आधिकारिक TMC गुट ने अपनी पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची चुनाव आयोग को सौंपी है। इस सूची में ममता बनर्जी को चेयरपर्सन, सुब्रत बख्शी को वाइस चेयरपर्सन और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए रखा गया है।
चुनाव आयोग के सामने पहुँच सकता है ‘असली TMC’ विवाद
बागी गुट ने अपने फैसलों और विशेष अधिवेशन की जानकारी चुनाव आयोग को देने की घोषणा की है। वहीं ममता गुट पहले ही अपनी नई पदाधिकारी सूची आयोग को भेज चुका है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच पार्टी पर अधिकार का संघर्ष चुनाव आयोग के सामने पहुँच सकता है।
चुनाव आयोग आमतौर पर ऐसे मामलों में संगठनात्मक बहुमत, निर्वाचित प्रतिनिधियों का समर्थन, पार्टी संविधान, संगठन के दस्तावेज और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की जांच करता है। विवाद बढ़ने की स्थिति में TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी दावा किया जा सकता है।
फिलहाल बागी गुट द्वारा अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाने की घोषणा मात्र से ममता बनर्जी का आधिकारिक पद स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। नेतृत्व की वैधानिक स्थिति चुनाव आयोग और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
कौन हैं अरूप रॉय?
अरूप रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वे लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और हावड़ा जिले में पार्टी का मजबूत संगठन खड़ा करने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।
अरूप रॉय ने वर्ष 2011 में हावड़ा मध्य विधानसभा क्षेत्र से पहली बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने 2016, 2021 और 2026 के विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट से विजय हासिल की। इस तरह वे लगातार चार बार हावड़ा मध्य से विधायक चुने जा चुके हैं।
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में अरूप रॉय ने 95,948 मत प्राप्त किए। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार बिप्लब कुमार मंडल को 16,083 मतों के अंतर से हराया।
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं अरूप रॉय
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार में अरूप रॉय लंबे समय तक मंत्री रहे। वे सहकारिता विभाग सहित कई जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं। इसके अलावा वे लंबे समय तक हावड़ा जिला तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे।
हावड़ा क्षेत्र में उनके संगठनात्मक प्रभाव और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संबंधों को देखते हुए विद्रोही गुट ने उन्हें चेयरपर्सन चुना है। बागी नेताओं को उम्मीद है कि अरूप रॉय के नेतृत्व में उन्हें पुराने और असंतुष्ट TMC कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल सकता है।
चुनावी हलफनामे में करीब ₹4.85 करोड़ की संपत्ति
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे के अनुसार अरूप रॉय की उम्र 70 वर्ष है। उन्होंने अपना पेशा अधिवक्ता बताया है और उनकी शैक्षणिक योग्यता ‘ग्रेजुएट प्रोफेशनल’ दर्ज है।
हलफनामे में उनकी कुल संपत्ति लगभग 4.85 करोड़ रुपये और देनदारियाँ करीब 22.83 लाख रुपये घोषित की गई हैं। उन्होंने अपने खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है।
TMC के भविष्य पर बढ़ी अनिश्चितता
ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। करीब तीन दशक तक पार्टी की राजनीति और संगठन उनके नेतृत्व के आसपास केंद्रित रहा है। ऐसे में पार्टी के ही विधायकों द्वारा समानांतर संगठन बनाकर नया चेयरपर्सन चुनना TMC के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितने निर्वाचित विधायक और संगठनात्मक पदाधिकारी खुले तौर पर अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट के साथ जाते हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग दोनों पक्षों के दावों को किस तरह देखता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
यह राजनीतिक संघर्ष केवल TMC के संगठन तक सीमित नहीं रह सकता। इसका असर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष की भूमिका, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और राज्य में विपक्षी राजनीति की दिशा पर भी पड़ सकता है।
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