अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर सैन्य तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसकी सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के भीतर मौजूद ISIS-K यानी इस्लामिक स्टेट खुरासान के ठिकानों को निशाना बनाया गया। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये ठिकाने अफगानिस्तान के खिलाफ हमलों और तोड़फोड़ की साजिशों में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
अफगानिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि कार्रवाई पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में की गई। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान रक्षा मंत्रालय ने बलूचिस्तान के पिशिन जिले के सरनान इलाके में ISIS सेंटर पर हमले की बात कही, साथ ही खैबर पख्तूनख्वा में भी ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के इन दावों पर अलग रुख अपनाया है। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बलूचिस्तान में चार “rudimentary drones” यानी साधारण ड्रोन देखे गए और उन्हें तुरंत निष्क्रिय कर दिया गया। प्रांतीय अधिकारियों ने सरनान में एक सरकारी स्कूल के पास ड्रोन दिखने की पुष्टि की और बताया कि घटना में दो लोग घायल हुए।
तालिबान सरकार का आरोप है कि पाकिस्तान की जमीन पर मौजूद ISIS-K ठिकानों से अफगानिस्तान के अंदर नागरिकों और सरकारी ढांचों पर हमले की योजना बनाई जा रही थी। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कार्रवाई “सटीक” तरीके से की गई और इसमें आतंकी नेटवर्क को नुकसान पहुंचा, जबकि नागरिकों को नुकसान नहीं हुआ। हवाले से बताया कि अफगानिस्तान ने इन ठिकानों को ISIS-K के बेस बताया है।
यह सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के हालिया एयरस्ट्राइक के बाद हुई है। पाकिस्तान ने 29 जून 2026 के आसपास अफगान सीमा से लगे इलाकों में हवाई कार्रवाई की थी। , संयुक्त राष्ट्र मिशन UNAMA ने कहा कि इन पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में कम से कम 28 नागरिक मारे गए और 49 घायल हुए, जबकि अफगान तालिबान ने 38 नागरिकों की मौत और 163 घायल होने का दावा किया।
रिपोर्ट में अफगान अधिकारियों के हवाले से पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में 36 नागरिकों की मौत और 160 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही गई थी। पाकिस्तान ने इन हमलों को अपने यहां हुए आतंकी हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया और दावा किया कि उसने आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि तालिबान शासन अपने क्षेत्र में उन आतंकी संगठनों को पनाह देता है, जो पाकिस्तान के भीतर हमले करते हैं। दूसरी ओर, तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि पाकिस्तान की सुरक्षा समस्या उसका आंतरिक मामला है।
यह भी बताया कि अफगानिस्तान के पास आधुनिक फाइटर जेट नहीं हैं, लेकिन उसके पास कुछ aircraft और helicopters हैं। तालिबान बलों के पास ड्रोन भी हैं, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान के साथ संघर्ष में पहले भी होने की बात सामने आई है। इसलिए ताजा हमलों को लेकर यह भी सवाल बना हुआ है कि कार्रवाई किस प्लेटफॉर्म से की गई।
पिछले कुछ महीनों से अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच मार्च में युद्धविराम की कोशिश हुई थी, लेकिन सीमा पर झड़पें और एयरस्ट्राइक लगातार जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की मध्यस्थता से तनाव कम करने की कोशिशें भी अब तक ठोस परिणाम नहीं दे पाई हैं।
मौजूदा घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर संघर्ष अब केवल TTP तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ISIS-K, सीमा सुरक्षा, ड्रोन युद्ध और क्षेत्रीय कूटनीति जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए हैं। अगर दोनों पक्षों ने संयम नहीं दिखाया, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है।
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