दुनिया के सबसे चर्चित टेक उद्यमी एलन मस्क और अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना के बीच USAID को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। विवाद तब तेज हुआ जब खन्ना ने 2025 में प्रकाशित एक Lancet अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि USAID में कटौती से 2030 तक 1.4 करोड़ से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, जिनमें 45 लाख से ज्यादा बच्चे पांच साल से कम उम्र के हो सकते हैं। इस दावे पर मस्क ने पलटवार करते हुए खन्ना को झूठ फैलाने वाला बताया और मुकदमा करने की चेतावनी दी।
यह विवाद ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में बनाए गए Department of Government Efficiency यानी DOGE से जुड़ा है, जिसका नेतृत्व शुरुआती महीनों में एलन मस्क ने किया था। DOGE के तहत अमेरिकी विदेशी सहायता खर्चों की समीक्षा और कटौती की गई थी। खन्ना और कई आलोचकों का आरोप है कि USAID में भारी कटौती से गरीब देशों में स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, HIV, TB और मलेरिया जैसे कार्यक्रमों पर गंभीर असर पड़ा। Reuters ने भी Lancet अध्ययन के आधार पर लिखा था कि USAID कटौती से 2030 तक 1.4 करोड़ से अधिक अतिरिक्त मौतों की आशंका जताई गई है।
Ro the Robber https://t.co/uUZlUjpEj9
— Elon Musk (@elonmusk) June 22, 2026
मस्क ने खन्ना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि DOGE ने केवल सहायता प्राप्त करने वालों की संपर्क जानकारी मांगी थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा धोखाधड़ी में नहीं जा रहा है। मस्क का दावा है कि कोई वैध जीवनरक्षक मेडिकल फंडिंग रोकी नहीं गई और जिन परियोजनाओं को जरूरी माना गया, उन्हें अब अमेरिकी विदेश मंत्रालय के तहत देखा जा रहा है। दूसरी तरफ, आलोचक कहते हैं कि USAID के बंद या कमजोर होने से जमीन पर मानवीय सहायता कार्यक्रमों की निरंतरता प्रभावित हुई। Reuters के अनुसार, USAID बंद होने के बाद सहायता वितरण 72 अरब डॉलर से घटकर 47 अरब डॉलर तक आ गया और हजारों कर्मचारियों की छंटनी हुई।
बहस यहीं तक सीमित नहीं रही। मस्क ने USAID पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी ने दुनिया भर में चुनावों को प्रभावित किया, भ्रष्ट नेताओं को फायदा पहुंचाया, वुहान से जुड़े खतरनाक रिसर्च को फंडिंग में मदद की और रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए माहौल बनाया। हालांकि, इन बड़े आरोपों पर अभी तक किसी अदालत या स्वतंत्र जांच एजेंसी ने व्यापक रूप से वैसा निष्कर्ष नहीं दिया है जैसा मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया है। इसलिए इन्हें फिलहाल मस्क के राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।
All DOGE required was contact information of the recipients to confirm that funding was not fraudulent. No validated medical funding was stopped.
Anything that appeared to be legitimate lifesaving funding continued and is now administered by the State Department.
If anyone had… https://t.co/xkaUhLxPiQ
— Elon Musk (@elonmusk) June 23, 2026
USAID को लेकर भ्रष्टाचार की बहस को अमेरिकी न्याय विभाग के एक मामले ने और तेज किया। जून 2025 में DOJ ने बताया कि USAID के एक पूर्व कॉन्ट्रैक्टिंग अधिकारी और तीन कॉरपोरेट अधिकारियों ने एक दशक लंबी रिश्वतखोरी योजना में अपराध स्वीकार किया। यह मामला 550 मिलियन डॉलर से अधिक के 14 प्रमुख अनुबंधों से जुड़ा था। मस्क समर्थक इस मामले को USAID में कथित गड़बड़ी का उदाहरण बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि किसी एक भ्रष्टाचार केस के आधार पर पूरी मानवीय सहायता प्रणाली को खत्म करना उचित नहीं था।
USAID के मीडिया और लोकतंत्र कार्यक्रम भी लंबे समय से विवादों में रहे हैं। 2022 में USAID की तत्कालीन प्रमुख सामंथा पावर ने “Partnerships for Democracy Fund” और “Reporters Mutual” जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया था। USAID का आधिकारिक तर्क था कि ये कार्यक्रम स्वतंत्र मीडिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी ईमानदारी को मजबूत करने के लिए थे। लेकिन आलोचकों का आरोप है कि इसी तरह के कार्यक्रमों के जरिए अमेरिका दूसरे देशों की राजनीति, मीडिया नैरेटिव और चुनावी माहौल पर असर डालता रहा।
The standard applied by DOGE was very simple and easy:
Provide contact information for the recipients of aid, so that we can confirm it is not fraudulent.
The reality is that money was being sent to corrupt politicians under the guise of aid! Liars and stock insider traders… https://t.co/AonwfFjxf2
— Elon Musk (@elonmusk) June 22, 2026
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने 2025 में USAID फैक्ट शीट के हवाले से बताया था कि एजेंसी ने 2023 में 6,200 पत्रकारों को ट्रेनिंग और सपोर्ट दिया, 707 गैर-सरकारी न्यूज आउटलेट्स की मदद की और 279 मीडिया-सिविल सोसाइटी संस्थाओं को समर्थन दिया। USAID के समर्थक इसे प्रेस स्वतंत्रता और लोकतंत्र-सहायता बताते हैं, जबकि आलोचक इसे मीडिया प्रभाव और नैरेटिव मैनेजमेंट का नेटवर्क मानते हैं।
WikiLeaks और कुछ रिपोर्टों में Internews Network को मिली अमेरिकी फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए। Anadolu Agency की रिपोर्ट के अनुसार, WikiLeaks ने दावा किया था कि Internews को करीब 472.6 मिलियन डॉलर की अमेरिकी फंडिंग मिली, जिसमें बड़ा हिस्सा USAID से आया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि Internews ने हजारों मीडिया आउटलेट्स के साथ काम किया और करोड़ों लोगों तक पहुंच रखने वाले कार्यक्रम तैयार किए। हालांकि Internews और USAID समर्थक इसे स्वतंत्र मीडिया सहायता बताते हैं, जबकि आलोचक इसे अमेरिकी प्रभाव के विस्तार के रूप में देखते हैं।
वुहान रिसर्च को लेकर भी विवाद पुराना है। USAID ने PREDICT नामक महामारी-निगरानी कार्यक्रम को फंड किया था, जिसका उद्देश्य जानवरों से मनुष्यों में फैल सकने वाले वायरस की पहचान करना था। EcoHealth Alliance इस कार्यक्रम से जुड़ा था और उसका वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से संबंध रहा। हालांकि, COVID-19 की उत्पत्ति पर वैश्विक स्तर पर अब भी विवाद और जांच जारी रही है। मस्क ने इसे USAID की बड़ी विफलता बताया, लेकिन यह कहना कि USAID ने सीधे COVID-19 “पैदा किया”, अभी सिद्ध तथ्य नहीं है।
यूक्रेन और अन्य देशों में अमेरिकी दखल को लेकर भी USAID पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। USAID स्वयं चुनावी सहायता, नागरिक समाज, लोकतांत्रिक संस्थाओं, राजनीतिक भागीदारी, भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों और मीडिया विकास को अपने लोकतंत्र कार्यक्रमों का हिस्सा बताता रहा है। समर्थकों के अनुसार, यह लोकतंत्र और पारदर्शिता को मजबूत करने की कोशिश है। आलोचकों के अनुसार, यही मॉडल कई देशों में सत्ता-संतुलन और राजनीतिक नैरेटिव को प्रभावित करने का माध्यम बनता है।
ट्रंप प्रशासन ने USAID को अमेरिकी विदेश नीति और बजट कटौती के केंद्र में रखकर बड़े बदलाव किए। Reuters के अनुसार, USAID के बंद होने और कार्यक्रमों की कटौती के बाद उसकी बची हुई कई जिम्मेदारियां विदेश मंत्रालय के तहत चली गईं। समर्थक इसे अमेरिकी करदाताओं के पैसे की बचत और “America First” नीति बताते हैं, जबकि पूर्व अधिकारियों और मानवीय सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक स्वास्थ्य और राहत कार्यक्रमों को भारी नुकसान हो सकता है।
कुल मिलाकर, मस्क और रो खन्ना की यह भिड़ंत केवल दो व्यक्तियों की बहस नहीं है, बल्कि अमेरिकी विदेशी सहायता नीति, टैक्सपेयर मनी, वैश्विक स्वास्थ्य, चुनावी हस्तक्षेप, मीडिया फंडिंग और राष्ट्रीय जवाबदेही पर बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन गई है। मस्क USAID को भ्रष्टाचार और विदेशी दखल का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि खन्ना और अन्य आलोचक इसे गरीब देशों की जीवनरक्षक सहायता व्यवस्था मानते हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद अमेरिकी राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel