विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद संबंधों को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तनावपूर्ण संबंध दोनों देशों के हित में नहीं हैं और भविष्य में भी मतभेद रह सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
गलवान संघर्ष पर जयशंकर का बयान:
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2020 की झड़पों को उन्होंने “रिश्ते के लिए बेहद अफसोसजनक” बताया।
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उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य टकराव नहीं था, बल्कि लिखित समझौतों के उल्लंघन का मामला था।
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जयशंकर ने स्वीकार किया कि अब भी कई मुद्दों पर समाधान लंबित है।
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हालांकि, पिछले साल अक्टूबर से भारत-चीन संबंधों में कुछ सुधार हुआ है।
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वे अपने चीनी समकक्ष वांग यी से कई बार मिल चुके हैं और अन्य भारतीय अधिकारी भी संवाद कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार पर चर्चा:
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जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार को लेकर “बहुत सक्रिय और गहन” बातचीत कर रहे हैं।
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दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल से लागू किए जाने वाले टैरिफ निर्णय को लेकर उत्सुक है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की पिछली मुलाकात के बाद 2025 तक एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बातचीत शुरू हो चुकी है।
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उन्होंने कहा कि व्यापार पर खुली चर्चा हो रही है, और यह मोदी-ट्रंप वार्ता का परिणाम है।
विश्लेषण:
✅ भारत-चीन संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश, लेकिन गलवान विवाद अब भी पूरी तरह हल नहीं।
✅ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर।
✅ मोदी सरकार की कूटनीतिक सक्रियता—दोनों बड़े वैश्विक शक्तियों (चीन और अमेरिका) से संबंध संतुलित रखने का प्रयास।