पाकिस्तान की एक और शर्मनाक हरकत सामने आई है। श्रीनगर जा रही इंडिगो की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराने वाले पायलट ने यात्रियों की जान बचाने के लिए लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी लेकिन अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि बुधवार को जब अचानक आंधी-तूफान और ओलावृष्टि होने लगी तो इंडिगो के पायलट ने खराब मौसम से बचने के लिए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र की अनुमति मांगी थी, जिसे लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने मना कर दिया था।
घटना का सार
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घटना दिनांक: बुधवार (22 मई 2025)
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फ्लाइट: इंडिगो 6E 2142 (दिल्ली से श्रीनगर)
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यात्री: लगभग 227, जिनमें TMC सांसद सागरिका घोष, डेरेक ओ’ब्रायन, नदीमुल हक, मानस भुइयां और ममता ठाकुर जैसे नेता भी शामिल थे।
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समस्या: आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के कारण खराब मौसम में विमान को आपात स्थिति में लैंड करना पड़ा।
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कार्यवाही: पायलट ने पहले पाकिस्तान के लाहौर ATC से हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति मांगी लेकिन इंकार कर दिया गया, जिसके बाद विमान की श्रीनगर एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग कराई गई।
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नुकसान: विमान के आगे का हिस्सा (रेडोम) ओलावृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त हो गया।
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
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पाकिस्तान का यह रवैया अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन सिद्धांतों और मानवीय दृष्टिकोण दोनों के विपरीत माना जा रहा है।
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ऐसे मामलों में जीवन की रक्षा सर्वोपरि होती है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत विमानों को आपातकाल में “मदद” मिलती है, न कि मना किया जाता है।
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यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने इस तरह के मामलों में असहयोगात्मक रवैया अपनाया हो।
DGCA की जांच
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DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) इस मामले की जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रेडोम को हुए नुकसान की स्थिति क्या थी, और क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ।
सागरिका घोष का बयान
सागरिका घोष ने इस घटना को “मौत के करीब पहुंचने वाला अनुभव” बताया और पायलट की बहादुरी की सराहना की। यह विमानन पेशेवरों की तत्परता और साहस का परिचायक है।
निष्कर्ष:
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पाकिस्तान का इनकार केवल एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक मिसाल है।
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भारतीय पायलटों की त्वरित प्रतिक्रिया ने 227 लोगों की जान बचाई।
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DGCA की जांच रिपोर्ट इस मामले के तकनीकी और नैतिक पहलुओं को उजागर करेगी।
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भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की जरूरत है, विशेषकर ICAO (International Civil Aviation Organization) में।