वैश्विक राजनीति इस समय एक अत्यंत अस्थिर और जटिल दौर से गुजर रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक के बाद एक भू-राजनीतिक संकट और शक्ति संतुलन के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ने न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित किया है, वहीं इजरायल-गाजा और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व को अशांत कर रखा है। दक्षिण एशिया में भी भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर छिटपुट सैन्य झड़पों ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। इस पहले से ही तनावपूर्ण परिदृश्य के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अचानक शुरू हुई टैरिफ वॉर ने वैश्विक व्यापार और कूटनीति दोनों में नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देने और भारत पर, खासकर रूसी तेल खरीदने को लेकर, 50% तक का टैरिफ लगाने के फैसले ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया मोड़ ला दिया है।
इसी उथल-पुथल भरे माहौल में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल के माध्यम से पुष्टि की है कि 21 अगस्त को मॉस्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और एस. जयशंकर के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी। इस मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदलते शक्ति समीकरण और अमेरिका के दबाव का सामना करने की रणनीति पर भी विचार कर सकते हैं।
FM Sergey #Lavrov's schedule:
🗓 On August 21, FM Sergey #Lavrov will hold talks with FM of India @DrSJaishankar in Moscow.
The Ministers will discuss key issues on our bilateral agenda, as well as key aspects of cooperation within international frameworks.#RussiaIndia pic.twitter.com/ck4qG1Z14P
— MFA Russia 🇷🇺 (@mfa_russia) August 13, 2025
भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगा, और अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस से सस्ते तेल का आयात जारी रखेगा। हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी, जो इस बात का संकेत है कि दिल्ली और मॉस्को के बीच बैक-टू-बैक उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क हो रहे हैं।
बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पुतिन के साथ विस्तृत बातचीत की थी, जिसमें यूक्रेन संकट पर शांति और कूटनीतिक समाधान के प्रति भारत के दृढ़ रुख की पुनः पुष्टि की गई। इस बातचीत में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा व्यापार और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। भारत ने यह भी संकेत दिया है कि वह अमेरिका और रूस के बीच संभावित संवाद का स्वागत करता है, क्योंकि यह तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।
कुल मिलाकर, जयशंकर की यह रूस यात्रा न केवल भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि यह भी तय करेगी कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को किस तरह बनाए रखता है।
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