स्पेस स्टेशन पहुंचकर शुभांशु करेंगे सात महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला गुरुवार को लगभग 28 घंटे के अंतरिक्ष सफर के बाद अपने तीन साथियों के साथ सफलतापूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। उनका स्पेसक्राफ्ट तय समय से 34 मिनट पहले स्टेशन से डॉक कर चुका है। डॉकिंग प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित रही। इस मौके पर शुभांशु ने “नमस्कार फ्रॉम स्पेस” कहते हुए भारत को अंतरिक्ष से पहला संदेश दिया और अपने मिशन को लेकर उत्साह जताया।
WATCH | #Axiom4Mission successfully docks at the International Space Station. The Mission has been piloted by India's Group Captain #ShubhanshuShukla
(Video: NASA via Reuters) pic.twitter.com/B9kXGc45kA
— ANI (@ANI) June 26, 2025
शुभांशु शुक्ला इस मिशन के दौरान सात प्रमुख वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जो भारतीय संस्थानों के सहयोग से तैयार किए गए हैं। ये सभी रिसर्च भविष्य के दीर्घकालिक स्पेस मिशनों और अंतरिक्ष जीवन के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
#WATCH | Lucknow, UP: The school of India's Group Captain #ShubhanshuShukla and his family erupts into applause as #Axiom4Mission successfully docks at the International Space Station.
The entire journey ot the mission and successful docking is being live-streamed here. pic.twitter.com/P7XwPmg0ME
— ANI (@ANI) June 26, 2025
शुभांशु शुक्ला द्वारा किए जाने वाले सात प्रमुख अंतरिक्ष प्रयोग:
- मायोजेनेसिस स्टडी (मांसपेशियों पर माइक्रोग्रैविटी का असर):
इस प्रयोग के ज़रिए पता लगाया जाएगा कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियां क्यों और कैसे कमजोर होती हैं। यह अध्ययन भारतीय Institute of Stem Cell Science and Regenerative Medicine के सहयोग से हो रहा है, जो मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों के इलाज में मदद करेगा। - फसलों के बीजों पर माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव:
यह प्रयोग बीजों के जेनेटिक गुणों पर शून्य गुरुत्वाकर्षण के असर का अध्ययन करेगा। इससे भविष्य में अंतरिक्ष में कृषि की संभावना को समझने में मदद मिलेगी। - टार्डीग्रेड्स पर प्रभाव:
शुभांशु टार्डीग्रेड्स नामक सूक्ष्म जीवों पर स्टडी करेंगे। यह पृथ्वी पर सबसे कठोर जीव माने जाते हैं जो अत्यधिक विकिरण, ठंड और वैक्यूम तक सह सकते हैं। यह अध्ययन यह पता लगाएगा कि अंतरिक्ष में इनका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है। - सूक्ष्म शैवाल (माइक्रोएल्गी) पर रिसर्च:
यह प्रयोग यह जांचेगा कि माइक्रोग्रैविटी में सूक्ष्म शैवाल कैसे प्रतिक्रिया करते हैं और क्या उन्हें भविष्य के स्पेस मिशनों में पोषण स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। - मूंग और मेथी बीजों के अंकुरण पर स्टडी:
इस रिसर्च का मकसद यह जानना है कि अंतरिक्ष में बीज अंकुरण की प्रक्रिया संभव है या नहीं। इससे स्पेस फार्मिंग की दिशा में नई राहें खुल सकती हैं। - बैक्टीरिया की दो प्रजातियों पर असर:
शुभांशु यह अध्ययन करेंगे कि माइक्रोग्रैविटी में बैक्टीरिया कैसे व्यवहार करते हैं, जिससे अंतरिक्ष में संक्रमण की रोकथाम या दवा निर्माण में मदद मिल सकती है। - कंप्यूटर स्क्रीन का आंखों पर प्रभाव:
अंतरिक्ष में लगातार स्क्रीन देखने का आंखों पर क्या असर होता है, शुभांशु इसका वैज्ञानिक परीक्षण करेंगे, जो अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य और विजुअल स्ट्रेस के मूल्यांकन के लिए जरूरी है।
इन प्रयोगों के निष्कर्ष भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, चंद्र और मंगल मिशनों की तैयारी, तथा दीर्घकालिक अंतरिक्ष जीवन के लिए भारत को वैज्ञानिक बढ़त दिला सकते हैं। शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
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