हाल ही में लॉस एंजिल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (LAX) पर अमेरिकी वायुसेना का अत्यंत रहस्यमयी बोइंग ई-4बी नाइटवॉच विमान देखा गया, जिसे पूरी दुनिया में ‘Doomsday Plane’ या ‘प्रलय का विमान’ कहा जाता है। इस विमान की मौजूदगी ने सोशल मीडिया से लेकर रणनीतिक हलकों तक हलचल मचा दी। बताया जा रहा है कि करीब 51 साल बाद यह विमान सार्वजनिक रूप से देखा गया, जो अपने आप में एक असामान्य और दुर्लभ घटना है। पिछले हफ्ते LAX पर इसकी लैंडिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे Airline Videos Live ने लाइव प्रसारित किया। इसके बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यूजर्स ने इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगानी शुरू कर दीं।
अमेरिका का 'डूम्सडे प्लेन' 51 वर्षों के बाद लॉस एंजिल्स में दुर्लभ रूप से दिखा, जिसने अटकलों को हवा दी#DoomsdayPlane #USAirForce #LosAngeles #NuclearCommand #E4B
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— One India News (@oneindianewscom) January 12, 2026
दरअसल, ई-4बी नाइटवॉच कोई साधारण विमान नहीं, बल्कि यह एक उड़ता हुआ कमांड सेंटर है। परमाणु हमले, युद्ध या किसी बड़े राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में अमेरिकी सरकार और सैन्य नेतृत्व को आसमान से संचालित करने के लिए इसे तैयार किया गया है। यह विमान इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) और परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाली तीव्र गर्मी को झेलने में सक्षम है। इसी वजह से इसे ‘उड़ता हुआ पेंटागन’ भी कहा जाता है। इसकी एक और खासियत यह है कि यह लगातार 6 से 7 दिनों तक हवा में रहकर संचालन कर सकता है, यानी बिना जमीन पर उतरे भी देश की कमान संभालने की पूरी क्षमता रखता है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर एक यूजर ने लिखा, “प्रेसिडेंशियल डूम्सडे प्लेन को LA इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरते देखा गया। यह न्यूक्लियर-प्रूफ, पता न लगने वाली एयरबोर्न कमांड यूनिट है। शायद यह अच्छा संकेत नहीं है।” कई यूजर्स ने इसे 2026 की सबसे बड़ी एविएशन घटना तक करार दिया। इसकी दुर्लभता और संवेदनशील भूमिका के चलते दुनियाभर में चर्चाएं तेज हो गईं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खास उड़ान में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी सवार थे। हालांकि, पेंटागन ने स्पष्ट किया कि यह उड़ान रक्षा मंत्री के ‘Arsenal of Freedom’ टूर का हिस्सा थी, जिसके तहत वे दक्षिणी कैलिफोर्निया में सैन्य भर्ती केंद्रों और एयरोस्पेस कंपनियों से मुलाकात करने गए थे। इसके बावजूद सवाल यह बना हुआ है कि सामान्य सरकारी विमान की जगह इतने अत्याधुनिक और महंगे ‘डूम्सडे प्लेन’ का इस्तेमाल क्यों किया गया, इस पर अब तक कोई आधिकारिक और स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
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