ब्रिक्स घोषणापत्र 2025: पाकिस्तान के आतंकवाद से लेकर ट्रंप के टैरिफ तक
ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरियो में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने एक मजबूत घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किया गया है। ‘रियो डी जेनेरियो घोषणापत्र’ में सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर अप्रत्यक्ष प्रहार, इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना और ब्रिक्स के विस्तार के बीच गहराते मतभेदों के बावजूद साझा सहमति की झलक देखने को मिली।
Addressed the BRICS Summit Plenary session on ‘Strengthening Multilateralism, Economic-Financial Affairs, and Artificial Intelligence.’ Focused on how to make the BRICS platform even more effective in this increasingly multipolar world. Also gave a few suggestions which are… pic.twitter.com/zRqyEa9q2v
— Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2025
घोषणापत्र में भले ही पाकिस्तान का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा और सीमा पार आतंकवाद, आतंक के वित्तपोषण और पनाहगाहों का जिक्र यह स्पष्ट करता है कि इशारा पूरी तरह पाकिस्तान की ओर है। चीन की मौजूदगी के चलते पाकिस्तान का नाम न लिया जाना स्वाभाविक था, फिर भी भारत की प्रभावशाली भूमिका के चलते आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा स्टैंड लिया गया। पीएम मोदी ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा, और ऐसे हमले केवल भारत नहीं, पूरी मानवता पर हमला हैं।
दूसरा बड़ा संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मिला है। ब्रिक्स नेताओं ने एकतरफा टैरिफ बढ़ोतरी पर “गंभीर चिंता” जताते हुए कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। हालांकि किसी भी देश या नेता का नाम नहीं लिया गया, फिर भी ट्रंप की नीतियों की साफ आलोचना की गई। इसके जवाब में ट्रंप ने भी धमकी देते हुए कहा कि जो देश ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों के साथ खुद को जोड़ेंगे, उन पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया जाएगा।
तीसरा संदेश ईरान के पक्ष में रहा। घोषणापत्र में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हाल ही में किए गए हमलों की आलोचना की गई और ईरान को परोक्ष समर्थन भी मिला। हालांकि, गाजा संघर्ष जैसे मामलों में मतभेद भी दिखे, जहां ब्रिक्स दो-राज्य समाधान की वकालत करता रहा, जबकि ईरान इजरायल के अस्तित्व को ही चुनौती देता है। इसके बावजूद ईरान ने घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जो समूह की आंतरिक एकता का संकेत है।
चौथा बड़ा संकेत ब्रिक्स नेतृत्व में आए बदलाव और प्रभाव को लेकर है। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार अनुपस्थित रहे, जबकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने वीडियो लिंक से भाग लिया। यह दिखाता है कि भू-राजनीतिक उलझनों के बावजूद ब्रिक्स वैश्विक शासन में एक बड़ा खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पुतिन ने भी इसी ओर इशारा करते हुए कहा कि ब्रिक्स अब सिर्फ आर्थिक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन का अहम स्तंभ बन चुका है।
At the BRICS Summit in Rio de Janeiro, Brazil, addressed the session on ‘Peace and Security and Reform of Global Governance.’ Expressed my views on why the voice of the Global South is more important than ever before and why it’s essential that global institutions provide… pic.twitter.com/XNqG8v1BXk
— Narendra Modi (@narendramodi) July 6, 2025
कुल मिलाकर, रियो डी जेनेरियो घोषणापत्र से ब्रिक्स ने एक साथ चार बड़े संदेश दिए हैं—पाकिस्तान को आतंकवाद पर, अमेरिका को टैरिफ और वैश्विक वर्चस्व पर, ईरान को समर्थन और दुनिया को यह दिखाने के लिए कि यह समूह अब वैश्विक शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभाने को तैयार है।