Skip to content
Wednesday, October 28, 2026 Ahmedabad 24°C

मिस्र की ‘वैली ऑफ किंग्स’ में मिले 2000 साल पुराने भारतीय शिलालेख, भारत-मिस्र व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क के नए प्रमाण

मिस्र की ‘वैली ऑफ किंग्स’ में मिले 2000 साल पुराने भारतीय शिलालेख, भारत-मिस्र व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क के नए प्रमाण

मिस्र की प्रसिद्ध ‘वैली ऑफ किंग्स’ (Valley of Kings) से करीब 2000 साल पुराने 30 शिलालेख मिलने के बाद इतिहासकारों और शोधकर्ताओं में उत्साह बढ़ गया है। इन शिलालेखों में भारत और मिस्र के बीच प्राचीन व्यापारिक संबंधों और सांस्कृतिक संपर्क के अहम संकेत मिले हैं। खास बात यह है कि इन पर लिखे शब्द तमिली (प्राचीन तमिल-ब्राह्मी), संस्कृत और प्राकृत भाषाओं में हैं, जो उस दौर में भारतीय उपमहाद्वीप से मिस्र की यात्राओं की पुष्टि करते हैं।

6 रॉक-कट कब्रों में मिले शिलालेख

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये शिलालेख छह अलग-अलग रॉक-कट कब्रों में मिले हैं। इनमें से 20 तमिली भाषा में और 10 संस्कृत व प्राकृत में लिखे गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि केवल दक्षिण भारत ही नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी भारत के लोग भी उस समय मिस्र जाते थे। ये कब्रें प्राचीन राजधानी थेब्स में स्थित हैं, जहाँ पहली से तीसरी सदी ईस्वी के बीच मसालों और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता था।

मिस्र कब्र लिपि तमिल संस्कृत भारत व्यापार

इस खोज की जानकारी स्विट्जरलैंड की लॉजेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इंगो स्ट्राउच और फ्रांस के EFEO की प्रोफेसर शार्लोट श्मिड ने तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) द्वारा आयोजित सम्मेलन में दी।

तमिल व्यापारी और शाही दूत का उल्लेख

शोधकर्ताओं को ‘सिकाई कोर्रान’ (Cikai Korran) नाम के व्यक्ति का उल्लेख कई शिलालेखों में मिला है, जिसे एक तमिल व्यापारी माना जा रहा है। माना जाता है कि वह प्राचीन ‘तमिलगम’ क्षेत्र से जहाज के जरिए मिस्र पहुँचा था। वहीं एक अन्य शिलालेख संस्कृत में है, जिसमें एक क्षहरात (Ksaharata) राजा के दूत का जिक्र है, जो भारत और मिस्र के बीच राजनयिक संपर्क का संकेत देता है।

शोधकर्ताओं को चौंकाने वाली खोज

प्रोफेसर इंगो स्ट्राउच ने बताया कि मिस्र में तमिली शिलालेख मिलना बेहद आश्चर्यजनक था, क्योंकि इन कब्रों को हर साल लाखों पर्यटक देखते हैं, फिर भी इन्हें पहले नोटिस नहीं किया गया। कब्र नंबर 14 में ‘सिकाई कोर्रान’ नाम करीब 6 मीटर ऊँची दीवार पर लिखा मिला। 2024 में पहला शिलालेख मिलने के बाद शोधकर्ताओं ने कुल 30 शिलालेखों की पहचान की।

भारत-रोम व्यापार के नए सबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भारत और रोमन साम्राज्य के बीच मजबूत व्यापारिक संबंधों के नए प्रमाण देती है। उस समय भारतीय मसाले, खासकर काली मिर्च, रोम में बेहद लोकप्रिय थे। थेब्स में मिले शिलालेखों को लाल सागर के बंदरगाह बेरेनाइक से भी जोड़ा गया है, जहाँ पिछले तीन दशकों से खुदाई जारी है और भारतीय भाषाओं के कई शिलालेख मिले हैं।

हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे

Like, Share and Subscribe our YouTube channel

🔗 https://www.youtube.com/@oneindianewscom

🔗 https://www.youtube.com/@oneindianewscom-Gujarat

Filed under India World

Share this story

Latest News

Explore States

News from every corner of India.