दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस Swarnkanta Sharma ने आबकारी नीति मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए Arvind Kejriwal समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्रवाई शुरू कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए न्यायपालिका और जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया गया।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट कहा—
“फेयर क्रिटिसिज्म और संगठित अभियान में फर्क होता है। जज को डराने या दबाव बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।”
उन्होंने यह भी कहा कि—
- “मैं डरने वाली नहीं हूँ”
- “कोर्ट केवल संविधान के सामने झुकती है, किसी राजनीतिक व्यक्ति के सामने नहीं”
सोशल मीडिया अभियान पर सवाल
कोर्ट के अनुसार—
- जज की छवि खराब करने के लिए चुनिंदा वीडियो और पत्र साझा किए गए
- यह संदेश देने की कोशिश की गई कि
यदि जज मन मुताबिक फैसला न दे, तो उसे बदनाम किया जाएगा
कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित पक्षों ने आदेश को चुनौती देने के बजाय सोशल मीडिया का सहारा लिया।
#Breaking
Delhi High Court initiates contempt of court proceedings against Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, Sanjay Singh, Saurabh Bharadwaj and Durgesh Pathak for their comments on Justice Swarana Kanta Sharma.
Justice Sharma says their conduct falls under the definition of…
— Bar and Bench (@barandbench) May 14, 2026
किन नेताओं का हुआ जिक्र?
कोर्ट ने अपने आदेश में कई नेताओं के बयान और पोस्ट का उल्लेख किया, जिनमें शामिल हैं—
- Manish Sisodia
- Sanjay Singh
- Saurabh Bharadwaj
- Vinay Mishra
- Durgesh Pathak
न्यायपालिका की गरिमा पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि—
- जज की निष्पक्षता पर सार्वजनिक सवाल उठाना न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाता है
- यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हुई, तो न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद दिल्ली की आबकारी नीति केस से जुड़ा है, जिसमें पहले से ही राजनीतिक और कानूनी टकराव जारी है। अब इस मामले में न्यायपालिका और नेताओं के बीच टकराव और गहरा गया है।
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