तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के हुजूरनगर से बच्चों के साथ कथित क्रूरता का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने पांच साल और दो साल के दो छोटे बच्चों को कथित रूप से पीटने, गर्म वस्तुओं से दागने और सिगरेट से जलाने के आरोप में एक दंपति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी दंपति की पहचान नकिरीकांती रवि और एस. इंदु के रूप में हुई है।
पुलिस और बाल कल्याण अधिकारियों को बच्चों के शरीर पर जलने, खरोंच और चोट के कई निशान मिले। विस्तृत पुलिस रिपोर्ट के अनुसार छोटे बच्चे की बाईं कलाई में फ्रैक्चर भी पाया गया। दोनों बच्चों को इलाज उपलब्ध कराया गया और बाद में उन्हें संरक्षण के लिए सूर्यापेट के एक बाल गृह भेजा गया।
बच्चों की चीख सुनकर पहुंचे पड़ोसी
मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने बच्चों के लगातार रोने और चीखने की आवाज सुनी। पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो दोनों बच्चों के शरीर पर कई चोट और जलने के निशान दिखाई दिए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई।
स्थानीय लोगों की सूचना के बाद इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज यानी ICDS, जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्डलाइन से जुड़े अधिकारी मामले की जांच के लिए पहुंचे। बच्चों को तत्काल सुरक्षा और चिकित्सा सहायता दी गई।
ICDS सुपरवाइजर की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
पुलिस के अनुसार हुजूरनगर सेक्टर की ICDS सुपरवाइजर सोमू निर्मला की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया। स्थानीय लोगों से मिली सूचना के बाद बाल संरक्षण अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपों की प्रारंभिक जांच की थी।
अधिकारियों को बताया गया कि कथित दुर्व्यवहार केवल एक दिन की घटना नहीं था। पड़ोसियों और प्रारंभिक जांच से यह आशंका सामने आई कि बच्चों के साथ कुछ समय से लगातार मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की जा रही थी।
गर्म वस्तुओं से दागने और सिगरेट से जलाने का आरोप
पुलिस जांच में बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं। बच्चों को कथित तौर पर गर्म धातु की वस्तुओं से दागा गया और उनके शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान मिले। उनके हाथ, पैर और पीठ पर जलने, खरोंच और दूसरी चोटों के निशान भी देखे गए।
इस मामले की अलग-अलग रिपोर्टों में “गर्म लोहे की रॉड” और “गर्म करछुल” का उल्लेख किया गया है। इसलिए प्रकाशन के लिए “गर्म धातु की वस्तुओं से दागने का आरोप” लिखना सबसे सटीक और सुरक्षित होगा।
छोटे बच्चे की कलाई में फ्रैक्चर
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब मेडिकल जांच में दो वर्षीय बच्चे की बाईं कलाई में फ्रैक्चर की बात सामने आई। अधिकारियों के अनुसार दोनों बच्चों को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दिए जाने के संकेत मिले हैं।
बच्चों को इलाज के लिए भेजा गया और उपचार पूरा होने के बाद उन्हें संरक्षण के लिए सूर्यापेट स्थित बाल गृह में स्थानांतरित किया गया। आगे उनके पुनर्वास और देखभाल की प्रक्रिया बाल कल्याण व्यवस्था के तहत की जाएगी।
पुलिस ने क्या बताया?
हुजूरनगर पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में दंपति ने कथित तौर पर बच्चों को अपनी “आजादी में बाधा” मानने की बात कही। पुलिस का दावा है कि इसी हताशा और गुस्से में बच्चों के साथ कथित क्रूरता की गई। यह जानकारी जांच अधिकारी के हवाले से सामने आई है।
हालांकि मामले में आरोपों की अंतिम कानूनी सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।
नकिरीकांती रवि और एस. इंदु पर किन धाराओं में केस?
पुलिस ने दंपति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 118(1) को धारा 3(5) के साथ लागू किया है। इसके अलावा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 भी लगाई गई है।
BNS की संबंधित धाराएं खतरनाक साधनों से चोट पहुंचाने और साझा इरादे से जुड़े आरोपों से संबंधित हैं, जबकि Juvenile Justice Act की धारा 75 बच्चे के साथ क्रूरता के मामलों से जुड़ी है। पुलिस ने कहा है कि जांच जारी है।
दंपति को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया
पुलिस ने आरोपी दंपति को हिरासत में लिया और कहा कि उन्हें रिमांड के लिए अदालत में पेश किया जाएगा। आगे की जांच में बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड, पड़ोसियों के बयान और कथित दुर्व्यवहार की अवधि की पड़ताल की जा रही है।
इस मामले में अदालत ही तय करेगी कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं और आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी क्या बनती है।
पारिवारिक संबंधों पर रिपोर्टों में अंतर
इस मामले की रिपोर्टिंग में बच्चों और आरोपी दंपति के पारिवारिक संबंधों को लेकर कुछ अंतर सामने आया है।
एक विस्तृत पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच वर्षीय बच्चा महिला की पहली शादी से है, जबकि दो वर्षीय बच्चा बाद की शादी से पैदा हुआ। दूसरी रिपोर्ट में दोनों बच्चों को महिला की पहली शादी की संतान बताया गया है।
इसलिए प्रकाशन में “दंपति के साथ रह रहे पांच और दो साल के दो बच्चे” लिखना फिलहाल सबसे तथ्यात्मक होगा।
पड़ोसियों की सतर्कता से बचाए गए बच्चे
इस पूरे मामले में पड़ोसियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बच्चों के लगातार रोने की आवाज सुनने के बाद स्थानीय लोगों ने मामले को नजरअंदाज नहीं किया और हस्तक्षेप किया। इसके बाद बाल संरक्षण और पुलिस अधिकारियों तक सूचना पहुंची।
समय पर शिकायत न होती तो कथित दुर्व्यवहार कितने समय तक जारी रहता, यह स्पष्ट नहीं है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चों के साथ कथित मारपीट कब से हो रही थी और क्या आसपास के अन्य लोगों को पहले इसकी जानकारी थी।
बच्चों को बाल गृह भेजा गया
इलाज के बाद दोनों बच्चों को सूर्यापेट के सरकारी बाल गृह भेज दिया गया है। बाल संरक्षण अधिकारियों की निगरानी में उनके पुनर्वास और आगे की देखभाल की प्रक्रिया की जा रही है।
पुलिस और बाल कल्याण एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि बच्चों को दोबारा किसी असुरक्षित वातावरण में न भेजा जाए।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशेगी पुलिस?
जांच में सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार कितने समय से चल रहा था। मेडिकल रिपोर्ट से चोटों की प्रकृति और उनकी संभावित उम्र समझने की कोशिश की जाएगी। पड़ोसियों और अन्य संभावित गवाहों के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे।
पुलिस यह भी जांच रही है कि बच्चों को पहले कभी चिकित्सा सहायता मिली थी या नहीं और कथित हिंसा की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को थी या नहीं।
हुजूरनगर की घटना ने झकझोरा
पांच और दो वर्ष के छोटे बच्चों के साथ कथित तौर पर इस तरह की क्रूरता ने तेलंगाना में बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है।
फिलहाल दोनों बच्चे सुरक्षित संरक्षण में हैं। आरोपी दंपति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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