तरिक्ष विज्ञान की दुनिया से भारत के लिए गर्व की खबर सामने आई है। भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन ने 14 जुलाई 2026 को रूस के Soyuz MS-29 अंतरिक्ष यान से अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा शुरू की। कजाकिस्तान स्थित बैकोनूर कॉसमोड्रोम से लॉन्च होने के लगभग तीन घंटे बाद उनका यान सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS से जुड़ गया।
अनिल मेनन के साथ रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos के कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन पर गए हैं। तीनों अंतरिक्ष यात्री लगभग आठ महीने तक ISS पर रहेंगे और उनके अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटने की संभावना है। यह अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष उड़ान है, जबकि दोनों रूसी अंतरिक्ष यात्रियों का यह दूसरा मिशन है।
बैकोनूर से उड़ान, तीन घंटे में ISS से डॉकिंग
Soyuz MS-29 ने भारतीय समय के अनुसार 14 जुलाई की रात बैकोनूर कॉसमोड्रोम से उड़ान भरी। यान ने पृथ्वी के दो चक्कर पूरे करने के बाद ISS के Prichal मॉड्यूल से सफलतापूर्वक डॉकिंग की। नए दल के पहुंचने के बाद अंतरिक्ष स्टेशन पर कुछ समय के लिए अंतरिक्ष यात्रियों की संख्या बढ़कर 10 हो गई।
अनिल मेनन Expeditions 74 और 75 के सदस्य के रूप में अंतरिक्ष स्टेशन पर काम करेंगे। उनका मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी प्रदर्शनों और भविष्य के लंबी अवधि वाले मानव अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी पर केंद्रित रहेगा।
Visual storytelling masterclass by NASA!
Astronaut Anna Menon (who flew to space in 2024) and her kids are seen cheering and waving from Baikonur, as husband Anil Menon blasts off on a Soyuz rocket to Int'l space station. All three are wearing "Team Menon" T-shirts. @astro_anil pic.twitter.com/59okwRyxiC
— Sidharth.M.P (@sdhrthmp) July 15, 2026
कौन हैं अनिल मेनन?
49 वर्षीय अनिल मेनन का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ। उनके पिता भारतीय और मां यूक्रेनी मूल की हैं। वह पेशे से आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ, मैकेनिकल इंजीनियर और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल हैं।
उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और मेडिकल डिग्री प्राप्त की। NASA ने उन्हें वर्ष 2021 के अंतरिक्ष यात्री वर्ग के लिए चुना था और उन्होंने 2024 में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पूरा किया।
NASA का अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले अनिल मेनन SpaceX के पहले फ्लाइट सर्जन थे। उन्होंने SpaceX के Demo-2 मिशन के दौरान कंपनी की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए चिकित्सा व्यवस्था तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह NASA के लिए ISS अभियानों में क्रू फ्लाइट सर्जन के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
अंतरिक्ष में करेंगे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने लगभग आठ महीने के प्रवास के दौरान अनिल मेनन मानव स्वास्थ्य, अंतरिक्ष चिकित्सा और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लेंगे। इन अध्ययनों का उद्देश्य यह समझना है कि लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने से मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।
NASA के अनुसार, मिशन के दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रदर्शनों के माध्यम से ऐसी जानकारियां जुटाई जाएंगी, जो चंद्रमा और मंगल के भविष्य के मानव अभियानों की तैयारी के साथ पृथ्वी पर चिकित्सा और तकनीकी विकास में भी उपयोगी हो सकती हैं।
पत्नी अन्ना मेनन भी कर चुकी हैं अंतरिक्ष यात्रा
अनिल मेनन की पत्नी अन्ना मेनन भी अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में SpaceX के Polaris Dawn मिशन में मिशन स्पेशलिस्ट और मेडिकल ऑफिसर के रूप में अंतरिक्ष यात्रा की थी। यह एक स्वतंत्र वाणिज्यिक कक्षीय मिशन था; Polaris Dawn अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन नहीं गया था। मिशन के दौरान पहली व्यावसायिक स्पेसवॉक सहित लगभग 40 वैज्ञानिक प्रयोग किए गए थे।
इस प्रकार अनिल और अन्ना मेनन उन चुनिंदा दंपतियों में शामिल हो गए हैं, जिनके दोनों सदस्यों ने अंतरिक्ष की यात्रा की है। दोनों के दो बच्चे हैं।
विज्ञान के मंच पर अमेरिका-रूस सहयोग की मिसाल
Soyuz MS-29 मिशन ऐसे समय में अमेरिका और रूस के बीच वैज्ञानिक सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जब दोनों देशों के राजनीतिक संबंध कई मुद्दों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं। अनिल मेनन NASA का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने रूस द्वारा विकसित Soyuz यान से उड़ान भरी और उनके साथ दो रूसी कॉस्मोनॉट भी मिशन पर गए हैं।
ISS कार्यक्रम अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा सहित कई अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से संचालित होता है। अलग-अलग देशों के अंतरिक्ष यात्री यहां मिलकर वैज्ञानिक अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष अभियानों पर काम करते हैं।
भारतीय मूल के अनिल मेनन की यह उपलब्धि अंतरिक्ष विज्ञान में भारतीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान को भी दर्शाती है। डॉक्टर, इंजीनियर, सैन्य अधिकारी और अब अंतरिक्ष यात्री के रूप में उनका सफर दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
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