केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों की तरह कानूनी संरक्षण देने की तैयारी कर रही है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है। इस सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रख सकती है। इनमें सबसे अधिक चर्चा प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर हो रही है।
प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करने, उसके गायन को रोकने या गायन के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन में इस विधेयक को परिचय, विचार और पारित किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही प्रस्तावित विधेयक को मंजूरी दे चुका है।
वंदे मातरम के अपमान पर क्या होगी सजा?
प्रस्तावित संशोधन के तहत वंदे मातरम के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने वाले व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
वर्तमान में प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के तहत भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान से जुड़े मामलों में दंड का प्रावधान है। इसके अंतर्गत राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकना या राष्ट्रगान गा रही सभा में व्यवधान उत्पन्न करना अपराध माना जाता है।
नए संशोधन के माध्यम से इसी प्रकार का कानूनी संरक्षण राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी दिए जाने की तैयारी है। विधेयक पारित होने के बाद वंदे मातरम के अपमान या उसके गायन को बाधित करने के मामलों में आपराधिक कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
किन गतिविधियों को अपराध माना जा सकता है?
प्रस्तावित कानून में वंदे मातरम से संबंधित कई गतिविधियों को दंडनीय बनाए जाने की संभावना है। इनमें—
- राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करना।
- वंदे मातरम के गायन को बलपूर्वक रोकना।
- गीत गा रही सभा या समूह में जानबूझकर व्यवधान पैदा करना।
- सार्वजनिक कार्यक्रम में हंगामा करके गायन को बाधित करना।
- राष्ट्रीय गीत के प्रति सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार करना।
किस गतिविधि को कानूनी रूप से ‘अपमान’ माना जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी विधेयक का आधिकारिक मसौदा संसद में पेश होने के बाद सामने आएगी।
राष्ट्रीय प्रतीकों जैसा कानूनी संरक्षण देने की तैयारी
सरकार का उद्देश्य वंदे मातरम को राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान की तरह वैधानिक सुरक्षा प्रदान करना बताया जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय गीत को अपमान और जानबूझकर उत्पन्न किए जाने वाले व्यवधान से कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
गृह मंत्रालय द्वारा पहले जारी दिशा-निर्देशों में उन सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम के गायन या वादन की व्यवस्था की गई थी, जहां राष्ट्रगान जन गण मन गाया या बजाया जाता है। अब सरकार इस व्यवस्था को कानून का स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राष्ट्रीय सम्मान कानून में अभी क्या प्रावधान हैं?
प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की रक्षा करता है। कानून के मौजूदा प्रावधानों के तहत सार्वजनिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज या संविधान को जलाना, फाड़ना, विकृत करना, कुचलना या उनका अपमान करना दंडनीय अपराध है।
कानून की धारा 3 राष्ट्रगान से संबंधित है। इसके अनुसार राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने या राष्ट्रगान गा रही सभा में व्यवधान उत्पन्न करने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
प्रस्तावित संशोधन में वंदे मातरम से संबंधित अपराधों को भी इसी कानूनी ढांचे में शामिल किए जाने की तैयारी है।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ सकती है जजों की संख्या
मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इस विधेयक के माध्यम से भारत के प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। इसका अर्थ है कि प्रधान न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट की कुल स्वीकृत न्यायिक क्षमता 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
सरकार के अनुसार चार अतिरिक्त जजों की नियुक्ति से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और सर्वोच्च न्यायालय की विभिन्न पीठों को अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में सहायता मिलेगी।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में भी संशोधन संभव
सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण से संबंधित कानून में भी बदलाव कर सकती है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनाना बताया जा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित अवधि के काफी समय बाद कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को सक्षम न्यायिक अथवा प्रशासनिक प्राधिकारी की अनुमति प्राप्त करनी पड़ सकती है।
हालांकि अंतिम नियम, समयसीमा और संबंधित अधिकारी की भूमिका विधेयक के आधिकारिक पाठ के संसद में पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
FCRA संशोधन विधेयक पर भी रहेगी नजर
मानसून सत्र में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026, यानी FCRA Amendment Bill पर भी विचार किए जाने की संभावना है।
FCRA कानून भारत में गैर-सरकारी संगठनों, संस्थाओं और अन्य पात्र संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे तथा उसके उपयोग को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित संशोधन विदेशी धन प्राप्त करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही, निगरानी और अनुपालन व्यवस्था में बदलाव कर सकता है।
विपक्ष और नागरिक संगठनों की ओर से आशंका जताई जा सकती है कि सख्त नियमों का प्रभाव सामाजिक, धार्मिक, मानवाधिकार और गैर-सरकारी संस्थाओं की विदेशी फंडिंग पर पड़ेगा। सरकार का पक्ष रहने की संभावना है कि विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा आवश्यक है।
उच्च शिक्षा के लिए विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक
मानसून सत्र में उच्च शिक्षा व्यवस्था से संबंधित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक भी चर्चा में रह सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य उच्च शिक्षा नियामक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन करना और अलग-अलग नियामक प्रक्रियाओं को अधिक समन्वित बनाना है।
विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति ने राज्यों की भूमिका, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, आईआईटी और आईआईएम जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के अधिकार तथा केंद्र सरकार की नियामक शक्तियों से संबंधित कई सुरक्षा उपाय सुझाए हैं।
समिति की सिफारिशों के बाद संशोधित विधेयक को संसद के सामने विचार और पारित किए जाने के लिए लाया जा सकता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक सूची में नहीं
राजनीतिक गलियारों में महिला आरक्षण लागू करने और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी चर्चा रही है। हालांकि मानसून सत्र के संभावित विधायी एजेंडे में इससे संबंधित कोई नया विधेयक प्रमुख रूप से सूचीबद्ध नहीं बताया गया है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार सत्र के दौरान अतिरिक्त विधायी कार्य नहीं ला सकती। संसदीय कार्यसूची में आवश्यकता के अनुसार बदलाव किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल घोषित संभावित एजेंडे में वंदे मातरम, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या, FCRA, कर सुधार, शिक्षा और पंजीकरण कानून से संबंधित विधेयक प्रमुख हैं।
विपक्ष और सरकार के बीच टकराव के आसार
वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने वाले विधेयक पर संसद में तीखी बहस होने की संभावना है। सत्तापक्ष इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा कदम बता सकता है।
विपक्षी दल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अपराध की स्पष्ट परिभाषा, कानून के संभावित दुरुपयोग और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े प्रश्न उठा सकते हैं। विशेष रूप से यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि किसी विरोध, असहमति या कार्यक्रम के दौरान होने वाली गतिविधि को वंदे मातरम का ‘अपमान’ किस आधार पर माना जाएगा।
विधेयक का वास्तविक प्रभाव उसके आधिकारिक प्रावधानों, अपराध की परिभाषा और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
विधेयक पेश होने के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल विधेयक से संबंधित जानकारी संसद के संभावित एजेंडे और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। विधेयक का आधिकारिक पाठ लोकसभा में पेश होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सरकार किन गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखेगी, सजा का सटीक स्वरूप क्या होगा और कानून लागू करने की प्रक्रिया कैसी होगी।
विधेयक को कानून बनने के लिए लोकसभा और राज्यसभा से पारित होना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर इसे अधिसूचित किया जाएगा।
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