अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार सातवीं रात ईरान के कई शहरों, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ढाँचों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन सहित खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाकर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए हैं। ईरान ने ओमान में अमेरिकी सैन्य रडार और अन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का भी दावा किया है।
इस संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुँच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
सिरीक, अहवाज और यज्द में अमेरिकी बमबारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, ताजा सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता, हथियार भंडार, निगरानी नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स ढाँचे, तटीय रक्षा प्रणालियों और समुद्री सैन्य संसाधनों को कमजोर करना है।
शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान के सिरीक, अहवाज और यज्द समेत कई इलाकों में हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित महत्वपूर्ण सैन्य और परिवहन ढाँचों को निशाना बनाया गया।
इससे पहले अमेरिका ने बंदर अब्बास से जुड़ने वाले रणनीतिक मार्गों और पुलों पर भी हमले किए थे। चाबहार में एक बड़े निगरानी एवं संचार टावर को नष्ट किए जाने की खबर है, जिसका इस्तेमाल कथित रूप से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए करती थी।
बिजली और बुनियादी ढाँचे पर हमलों से संकट
अमेरिकी हमलों में ईरान के बिजलीघरों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और पावर नेटवर्क को भी नुकसान पहुँचने की खबरें सामने आई हैं। भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति बाधित होने से ईरान के कई क्षेत्रों में संकट गहराने की आशंका है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। स्वतंत्र रूप से सभी हताहतों और नुकसान की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किया पलटवार
अमेरिकी हमलों के जवाब में IRGC ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के प्रतिष्ठानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की नई लहर शुरू कर दी।
ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया। इसके अतिरिक्त ओमान में अमेरिकी रडार प्रणालियों तथा उत्तरी हिंद महासागर में एक अमेरिकी जहाज पर हमला किए जाने का भी दावा सामने आया है।
बहरीन में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए, जबकि कतर में एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को रोकने का प्रयास किया गया।
कुवैत के बिजली और पानी के प्लांट को भारी नुकसान
कुवैत में हुए एक ईरानी हमले से प्रमुख बिजली उत्पादन और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुँचा है। हमले के बाद संयंत्र में आग लग गई और देश की पानी तथा बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई।
कुवैत अपने पीने के पानी के लिए बड़े पैमाने पर समुद्री जल शोधन संयंत्रों पर निर्भर है। इसलिए ऐसे प्रतिष्ठान को हुआ नुकसान देश के लिए गंभीर बुनियादी ढाँचा संकट पैदा कर सकता है।
MQ-9 ड्रोन गिराने का ईरान का दावा
ईरान ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है। IRGC ने बहरीन में अमेरिकी ड्रोन से जुड़े एक भंडारण केंद्र और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुँचाने का भी दावा किया।
हालाँकि अमेरिका की ओर से इन सभी दावों की स्वतंत्र या विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है। युद्ध के बीच दोनों पक्ष एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुँचाने के दावे कर रहे हैं, इसलिए सैन्य क्षति से जुड़ी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना संघर्ष का सबसे खतरनाक केंद्र
अमेरिका-ईरान संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से असुरक्षित बना दिया है और नियमों का उल्लंघन करने वाले कई जहाजों को रोका है। IRGC का दावा है कि दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने टैंकरों में बारूदी सुरंगों से विस्फोट होने के कुछ ईरानी दावों को खारिज किया है। दूसरी ओर अमेरिका ने भी नाकाबंदी लागू करते हुए ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले कुछ वाणिज्यिक जहाजों को रोकने, उनकी तलाशी लेने और उनका मार्ग बदलने की कार्रवाई की है।
तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक सप्लाई पर खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही घटने और अमेरिका-ईरान संघर्ष के विस्तार के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ताजा घटनाक्रम के बाद तेल कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक उछाल की खबर है।
यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो दुनिया के कई देशों में पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। समुद्री बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
हूती विद्रोहियों को अलर्ट किए जाने का दावा
ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ने सैन्य हमले जारी रखे, तो क्षेत्रीय संघर्ष और फैल सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को लाल सागर और बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग पर कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ लाल सागर का समुद्री मार्ग भी गंभीर रूप से बाधित होता है, तो एशिया और यूरोप के बीच ऊर्जा तथा माल परिवहन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध का खतरा
अमेरिका और ईरान की ओर से लगातार किए जा रहे हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी बढ़ते संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराते खतरे को लेकर चिंता जताई है।
फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं। अमेरिका ईरान की सैन्य और समुद्री क्षमता को कमजोर करने की बात कर रहा है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि हमले जारी रहने पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी।
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