उत्तर प्रदेश के बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जनसुनवाई के दौरान राज्य महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला ने दिल्ली में हुए CJP (सीजेपी) छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आंदोलन के दौरान मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
सोमवार को महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में महिला संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए पहुंची थीं। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने महिलाओं से जुड़े विभिन्न मामलों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
मीडिया से बातचीत करते हुए मीनाक्षी भराला ने बताया कि जनसुनवाई में 12 से 15 मामले सामने आए हैं। इनमें कुछ मामले पहले से लंबित थे, जबकि कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों को लेकर संबंधित थाना प्रभारियों से बातचीत की गई है और महिला सुरक्षा आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस दौरान जब उनसे दिल्ली में हुए CJP छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर आंदोलन से जुड़े कई वीडियो देखे हैं। उनके अनुसार कुछ वीडियो में छात्र और छात्राएं बेहद आपत्तिजनक और अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते दिखाई दे रहे थे।
मीनाक्षी भराला ने कहा,
“धरना देना छात्रों का अधिकार है, लेकिन मैंने ऐसी वीडियो देखी हैं जिनमें छात्र भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे थे। छात्राएं भी उससे अधिक आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रही थीं। आंदोलन के दौरान छात्रों को संयम और मर्यादा का पालन करना चाहिए था।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शनकारियों के इस व्यवहार के बाद स्थिति बिगड़ी और उसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। उनके अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी होती है और किसी भी आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाना चाहिए।
कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर नाम लिखने के मुद्दे पर भी महिला आयोग सदस्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुकानदारों को अपनी दुकानों पर नाम लिखने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम धार्मिक आस्थाओं के सम्मान के लिए उठाया गया है।
मीनाक्षी भराला ने कहा कि हिंदू धर्म में श्रावण मास का विशेष महत्व है और इस दौरान मांस एवं मदिरा का सेवन वर्जित माना जाता है। ऐसे में धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के सम्मान के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए।
जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन के कई अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। महिला आयोग ने महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए।
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