प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान अपने और अपनी दिवंगत मां के खिलाफ कथित रूप से इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की देर रात इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने नाराजगी व्यक्त करने के बजाय युवाओं को माफ करने और उन्हें सही दिशा दिखाने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्द किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देते। उन्होंने घटना को लेकर लोगों में पैदा हुए आक्रोश को स्वाभाविक बताया, लेकिन साथ ही कहा कि संबंधित युवाओं को दंडित करने, अदालतों के चक्कर कटवाने या सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने से परिस्थितियां नहीं बदलेंगी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं के प्रति सुलह और संवाद का रुख अपनाते हुए समाज से भी उन्हें माफ करने की अपील की।
‘गलतियों से सीखने का अवसर मिलना चाहिए’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बचपन और युवावस्था में गलतियां हो सकती हैं तथा गलतियों से सुधार का अवसर देना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सजा देने के बजाय उन्हें समझाना और देश के विकास में सहभागी बनाना अधिक आवश्यक है।
पीएम मोदी ने दांत और जीभ का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी दांतों के नीचे जीभ आ जाने से चोट लग जाती है, लेकिन इसके कारण दांत नहीं तोड़े जाते, क्योंकि दोनों शरीर के अपने अंग हैं। इसी तरह भटके हुए बच्चे भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें वापस सही रास्ते पर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपनी गलतियों से सीखने, नए कौशल हासिल करने और अपने सपनों के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश की प्रगति के साथ युवाओं का भविष्य भी उज्ज्वल होना चाहिए।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का वीडियो हुआ था वायरल
यह विवाद 23 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर आयोजित एक युवा प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें एक युवती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की, जबकि अन्य लोगों ने राजनीतिक असहमति और आपराधिक कार्रवाई के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
युवती के खिलाफ Zero FIR दर्ज
मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में युवती के खिलाफ Zero FIR दर्ज की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत जानबूझकर अपमान करने, सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाले कथन और मानहानि से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। चूंकि कथित घटना दिल्ली में हुई थी, इसलिए मामला संबंधित क्षेत्राधिकार वाली दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित किया गया।
Zero FIR ऐसी प्राथमिकी होती है जिसे घटना के क्षेत्राधिकार से अलग किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया जा सकता है। बाद में जांच के लिए उसे संबंधित पुलिस थाने को भेज दिया जाता है।
हालांकि, FIR दर्ज होना आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। मामले में आपराधिक जिम्मेदारी तय करने का अधिकार जांच एजेंसियों और अदालत के पास है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल आपत्तिजनक या असभ्य भाषा का इस्तेमाल अपने आप में हर परिस्थिति में आपराधिक दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं होता; यह कथन के संदर्भ, उद्देश्य और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
🚨Zero FIR lodged against girl named Ruchika Singh for abusing PM Modi during CJP protest pic.twitter.com/sE5Q69OvsN
— The Tatva (@thetatvaindia) July 30, 2026
सजा के बजाय संवाद का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का प्रमुख केंद्र युवाओं को दंडित करने के बजाय संवाद, मार्गदर्शन और सुधार का अवसर देना रहा। उन्होंने कहा कि गुमराह लोगों को सही रास्ता दिखाना कठिन जरूर है, लेकिन समाज को ऐसे ही कठिन कार्य करने चाहिए।
पीएम मोदी ने युवाओं को देश के विकास से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि वे गलतियों से सीखें, कुछ नया सीखें और अपने सपनों को लेकर आगे बढ़ें। उनका यह संबोधन ऐसे समय सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर राजनीतिक विरोध की भाषा, युवाओं की भागीदारी और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर व्यापक बहस चल रही है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक असहमति के दौरान मर्यादित भाषा, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कानूनी प्रभाव और युवाओं के प्रति समाज के व्यवहार जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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